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Mumbai News: महात्मा गांधी पर लिखा निबंध, तो हाई कोर्ट ने कम कर दी सजा; सालों से रेप केस की सजा काट रहा था दोषी

Mumbai News: बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2016 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा 12 साल कर दी है. हालांकि, कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए लंबी जेल अवधि और सुधारात्मक प्रयासों को आधा मानते हुए, ये फैसला लिया है.

By: Preeti Rajput | Published: February 11, 2026 1:08:56 PM IST



 
Mumbai News: बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने एक नाबालिग लड़की से रेप केस में दोषी एक आदमी की उम्रकैद की सजा घटाकर 12 साल कर दी है. कोर्ट ने उसकी कम उम्र, लंबी जेल अवधि और जेल में सुधार की कोशिश को ध्यान में रखते हुए सजा को कम किया हुआ है. सुधार की कोशिशों में सबसे ज्यादा ध्यान महात्मा गांधी पर लिखे एक निबंध प्रोग्राम में हिस्सा लेना भी शामिल है. जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने 2 फरवरी के अपने आदेश में साल 2016 के जुर्म में आदमी की सजा को बरकरार रखा है. लेकिन कहा कि उसे दी गई उम्रकैद की सजा कम की जानी चाहिए. 

उम्रकैद की सजा हुई कम 

बेंच ने यह आदेश की दोषी की अपील पर दिया है. उसने स्पेशल POCSO कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी. अदालत ने कहा कि अपराध के समय दोषी की उम्र 20 साल थी. उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं थी. वह दिसंबर साल 2016 से हिरासत में था. उसे COVID-19 महामारी के दौरान भी रिहा नहीं किया गया था. बेंच ने जेल की पढ़ाई-लिखाई की एक्टिविटीज में उसके हिस्सा लेने वाले सर्टिफिकेट पर भी विचार किया है. जिसमें एक निबंध कॉम्पिटिशन भी शामिल था. जिसमें महात्मा गांधी के विचारों पर स्टडी करने वाला एक प्रोग्राम शामिल था.
 

’12 साल की सजा काफी होगी’

जुर्म की गंभीरता के हिसाब से इन सुधार वाले कार्यों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. बेंच ने कहा कि ‘हमारी राय में 12 साल की सजा इंसाफ के लिए सही होगी.’ बेंच ने कहा कि ‘हमारी राय में 12 साल की सजा इंसाफ के लिए सही होगा.’ इसमें आगे कहा गया कि दोषी ने जो समय पहले ही जेल में बिताया है. उसे कम की सजा में समयोजित कर दिया जाएगा. 

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