BJP Nitesh Rane On Salman Khan: मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इस भव्य आयोजन में देश की कई जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी ने पहले ही ध्यान खींचा था, लेकिन बॉलीवुड एक्टर सलमान खान की शिरकत ने राजनीतिक बयानबाजी को और हवा दे दी. सलमान खान का संघ के मंच पर दिखना कुछ दलों को रास नहीं आया, वहीं बीजेपी ने इसे हिम्मत वाला कदम बताया. हाल ही में नेता संजय राउत ने सलमान खान की मौजूदगी पर सवाल उठाए थे जिस पर नितेश राणे ने जवाब दिया और हिम्मत बताया और साथ ही उद्धव ठाकरे पर भी पलटवार किया.
नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे पर किया पलटवार
बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने पलटवार करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला बोला. नितेश राणे ने कहा कि सलमान खान उद्धव ठाकरे से ज्यादा हिंदू हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सलमान खान ने संघ के कार्यक्रम में शामिल होकर हिम्मत दिखाई है, जबकि कुछ लोग बिना जानकारी के बयानबाजी कर रहे हैं.
नितेश राणे ने ये भी कहा कि वे खुद मोहन भागवत के कार्यक्रम में मौजूद थे और वहां किसी भी भाषा या समुदाय का अपमान नहीं किया गया. उन्होंने राज ठाकरे को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी जानकारी गलत है और मोहन भागवत पर लगाए गए आरोप गलत हैं. राणे ने AIMIM का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों को मालेगांव जैसे मुद्दों पर बोलने की हिम्मत नहीं, वे बेवजह संघ पर सवाल उठा रहे हैं.
संजय राउत ने उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सलमान खान की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. राउत ने तंज कसते हुए कहा कि सलमान खान कब से संघ के स्वयंसेवक बन गए. उन्होंने ये भी कहा कि संघ के मंच पर इस तरह के मेहमानों को बुलाने के पीछे क्या सोच है, ये साफ होना चाहिए. राउत के बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई.
राउत यहीं नहीं रुके. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि मौजूदा माहौल में लोग अब कहने लगे हैं कि ‘चले जाओ, झंझट क्यों लेना,’ जो सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियों पर कटाक्ष माना गया. उनके इस बयान ने बीजेपी नेताओं को जवाब देने का मौका दे दिया.
सलमान खान की मौजूदगी बनी राजनीतिक हलचल
कुल मिलाकर, सलमान खान की मौजूदगी ने RSS के शताब्दी समारोह को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया है. एक तरफ इसे सामाजिक साहस का प्रतीक बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर बीजेपी पर हमला कर रहा है. आने वाले दिनों में ये विवाद और गहराने के आसार साफ नजर आ रहे हैं.