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Who is Dhruv Sharma: एक ही फ्लोर 25 लोगों को बेचने वाला ध्रुव दत्ता शर्मा कौन है,रियल एस्टेट में कर डाला 500 करोड़ का घोटाला

Dhruv Sharma Fraud Case: गुरुग्राम से एक बड़ी खबर आई है जहां पर एक बड़े रियल स्टेट का खुलासा हुआ है की 32nd Avenue प्रोजेक्ट के CEO ध्रुव दत्त शर्मा ने लोगों के साथ धोखा किया है. आइए जानते हैं मामले के बारे में सबकुछ-

By: sanskritij jaipuria | Last Updated: February 9, 2026 11:23:13 AM IST



Who is Dhruv Sharma |  Dhruv Sharma Fraud Case: गुरुग्राम पुलिस ने एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले का खुलासा करते हुए 32nd Avenue प्रोजेक्ट के CEO और प्रमुख ध्रुव दत्त शर्मा को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उन्होंने सैकड़ों निवेशकों से धोखाधड़ी की और एक ही प्रॉपर्टी यूनिट को कई लोगों को बेच दिया.

पुलिस के अनुसार, ध्रुव शर्मा ने निवेशकों को लंबे समय तक तय किराया मिलने का भरोसा दिया था. कहा गया था कि 20 से 30 साल तक नियमित मासिक आय मिलेगी और जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी वापस खरीदने का ऑप्शन भी रहेगा. इन्हीं वादों पर भरोसा कर कई लोगों ने करोड़ों रुपये लगाए.

 किराया बंद, टैक्स भी जमा नहीं

आरोप है कि अगस्त 2025 के बाद किराया मिलना बंद हो गया. इसके साथ ही टीडीएस, जीएसटी, पीएफ और ईएसआई जैसे जरूरी सरकारी भुगतान भी जमा नहीं किए गए. निवेशकों को बार-बार आश्वासन दिया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ.

करीब दो महीने पहले कई निवेशक पुलिस आयुक्त की जनसुनवाई में पहुंचे और धोखाधड़ी की शिकायत की. शिकायतों की संख्या और रकम को देखते हुए मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा गया. अब तक इस मामले में पांच से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं.

 500 से 1000 निवेशक प्रभावित होने की आशंका

पुलिस का अनुमान है कि इस घोटाले में 500 से 1000 लोग प्रभावित हो सकते हैं. अब तक 40 से 50 शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए गए हैं. हर निवेशक से एक करोड़ से ढाई करोड़ रुपये तक की ठगी होने की बात सामने आ रही है. कुल घोटाले की रकम 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.

 एक ही यूनिट कई लोगों को बेचने का शक

जांच में ये भी सामने आया है कि कई प्रॉपर्टी यूनिट्स एक से ज्यादा लोगों को बेची गईं. इससे ये संदेह और गहरा गया है कि निवेशकों को कभी असली कब्जा मिलने वाला ही नहीं था. जब लोगों ने कब्जा या बायबैक की मांग की, तो कंपनी असमर्थ दिखी.

पुलिस पूछताछ में ये भी सामने आया है कि निवेशकों से जुटाया गया पैसा गोवा में महंगी कोठियों और राजस्थान के नीमराना में प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया. इससे फंड के गलत इस्तेमाल की बात मजबूत हुई है.

 वरिष्ठ नागरिक निवेशक ने अदालत का रुख किया

इस मामले में वरिष्ठ नागरिक निवेशक अरविंद गुप्ता ने गुरुग्राम कोर्ट में याचिका दायर की है।ृ. उन्होंने कंपनी और प्रमोटरों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकाने के आरोप लगाए हैं. अदालत ने इस पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है.

याचिका में बैंक खातों को सील करने, संपत्तियों को जब्त करने, फॉरेंसिक ऑडिट कराने और आरोपियों के पासपोर्ट निलंबित करने की मांग की गई है. आरोप है कि नकली टीडीएस सर्टिफिकेट दिखाकर निवेशकों को गुमराह किया गया.

  

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