US-Iran Tension: एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति की बात करते है, तो दूसरी तरफ युद्ध की तैयारी कर रहे है. उनके विरोधाभासी कामों से पूरी दुनिया हैरान है. गुरुवार (22 जनवरी) को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में 20 से ज़्यादा देशों के नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस लॉन्च किया और दुनिया भर में शांति कायम करने की बात कही है. हालांकि सिर्फ़ 24 घंटे के अंदर ही उन्होंने अब ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन का संकेत दिया है. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की अभूतपूर्व तैनाती साफ तौर पर दिखाती है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तनाव बहुत नाज़ुक मोड़ पर पहुंच गया है.
तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर और दूसरे मिलिट्री साज़ो-सामान की तैनाती बढ़ा दी है. इसके अलावा उसने जॉर्डन और कतर जैसे सहयोगी देशों के ठिकानों पर F-15E स्ट्राइक ईगल और A-10 थंडरबोल्ट II जैसे विमान तैनात किए है. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती अमेरिकी सेना की सुरक्षा के लिए एक एहतियाती कदम है और यह इस क्षेत्र में एकतरफ़ा मिलिट्री एक्शन का संकेत नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मिलिट्री एक्शन से बचने की उम्मीद जताई है, लेकिन ईरान के पास भारी मिलिट्री तैनाती ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस बीच ईरान ने कहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा.
अरब सागर से लेकर फ़ारसी खाड़ी तक युद्धपोत
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और एक अटैक सबमरीन के साथ अरब सागर या फ़ारसी खाड़ी में तैनात किया जा रहा है. यह बेड़ा पहले दक्षिण चीन सागर में था, लेकिन ट्रंप के निर्देशों के बाद इसे पश्चिम की ओर मोड़ दिया गया है. अब यह ओपन-सोर्स ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) पर दिखाई नहीं दे रहा है, जिसे आमतौर पर युद्ध की तैयारियों का संकेत माना जाता है.
लड़ाकू विमान पहले से ही मोर्चे पर
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान भी तैनात किए है. इसी स्क्वाड्रन का इस्तेमाल अप्रैल 2024 में इज़राइल को ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाने के लिए किया गया था. इसके अलावा लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा देने के लिए KC-135 एयर टैंकर तैनात किए गए है. इससे हमले की रेंज और मारक क्षमता में काफ़ी बढ़ोतरी होती है.
मिसाइल डिफेंस भी सक्रिय
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट क्षेत्र में खासकर इज़राइल और कतर जैसे सहयोगी देशों में THAAD और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए है. ये इंतज़ाम और तैयारियां साफ तौर पर दिखाती हैं कि अमेरिका न सिर्फ हमला करने के लिए बल्कि जवाबी हमलों से बचाव के लिए भी पूरी तरह तैयार है. आधिकारिक तौर पर अमेरिका का दावा है कि यह दबाव ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण है. अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में 3,117 लोगों की मौत हुई है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि असली संख्या 20,000 से ज़्यादा हो सकती है.
ईरान ने ट्रंप के दावे को खारिज किया
ट्रंप ने दावा किया कि उनके दबाव के कारण ईरान को 840 फांसी की सज़ा रोकनी पड़ी और चेतावनी दी कि अगर अत्याचार नहीं रुके तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी. हालांकि ईरान के टॉप प्रॉसिक्यूटर ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को “पूरी तरह से झूठा” बताकर खारिज कर दिया है. ईरानी न्यायपालिका की न्यूज एजेंसी, मिज़ान ने देश के टॉप प्रॉसिक्यूटर मोहम्मद मोवाहेदी के हवाले से यह बात कही. मिज़ान के अनुसार, मोवाहेदी ने कहा, “यह दावा पूरी तरह से झूठा है; ऐसी कोई संख्या मौजूद नहीं है, और न ही न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला लिया है.”