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40 वर्षीय महिला को यूटीआई की चोट, डायबिटीज या प्रेग्नेंसी नहीं, केवल 1 गंदी आदत थी वजह; जानें कैसे करें बचाव

Urinary Tract Infection: यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTIs) महिलाओं में एक आम समस्या है. जो बैक्टीरिया के यूरिनरी ट्रैक्ट में जाने से होता है. ज़्यादातर महिलाओं को अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी UTI होता है. यह इन्फेक्शन बैक्टीरिया के ब्लैडर और उसकी नसों को इन्फेक्ट करने से होता है.

By: Mohammad Nematullah | Published: January 23, 2026 8:44:14 PM IST



Urinary Tract Infection: यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTIs) महिलाओं में एक आम समस्या है. जो बैक्टीरिया के यूरिनरी ट्रैक्ट में जाने से होता है. ज़्यादातर महिलाओं को अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी UTI होता है. यह इन्फेक्शन बैक्टीरिया के ब्लैडर और उसकी नसों को इन्फेक्ट करने से होता है. हालांकि यह इन्फेक्शन पुरुषों में भी हो सकता है. लेकिन यह महिलाओं में ज़्यादा आम है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके आम कारणों में बार-बार बिना प्रोटेक्शन के सेक्स, मेनोपॉज, गर्भनिरोधक गोलियों का ज़्यादा इस्तेमाल, कम इम्यूनिटी, एंटीबायोटिक्स का ज़्यादा इस्तेमाल, डायबिटीज और ब्लैडर को पूरी तरह से खाली न करना शामिल है. हालांकि 40 साल की महिला में UTI का कारण जानकर सब हैरान रह गए है.

6 महीने तक बार-बार इन्फेक्शन

TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार 40 साल की एक महिला को छह महीने तक बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होता रहा, जबकि उसकी लाइफस्टाइल में कोई साफ समस्या नहीं थी. इन्फेक्शन इतना गंभीर हो गया था कि वह किडनी फेलियर के कगार पर थी. जालंधर के यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरिंदर विर्दी ने इस पूरे मामले के बारे में एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा है कि, “वह 40 साल की थी. कॉर्पोरेट जॉब करती थी. लंबे समय तक काम करती थी. अनुशासित ज़िंदगी जीती थी. उसे डायबिटीज़ नहीं थी. उसके इम्यून सिस्टम में कोई समस्या नहीं थी. किडनी में पथरी नहीं थी. प्रेग्नेंट नहीं थी. फिर भी… उसे 6 महीने तक बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होता रहा.”

UTI इन्फेक्शन किडनी तक पहुंच गया 

एंटीबायोटिक्स लेने के बाद भी जिससे कुछ समय के लिए आराम मिला, उसका यूरिनरी इन्फेक्शन बार-बार होता रहा है. डॉ. वरिंदर ने विस्तार से बताया “उसे लगा कि यह स्ट्रेस की वजह से है. उसे लगा कि यह लंबे समय तक ऑफिस में काम करने का असर है. उसे लगा कि यह महिलाओं में आम है. फिर एक रात… तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी, कमज़ोरी जब तक वह अस्पताल पहुंची, इन्फेक्शन उसकी किडनी तक पहुंच गया था. 

डॉ. वरिंदर के अनुसार, वह महिला “पिछले 6 महीनों से एक दोस्त की सलाह पर हर 3-4 दिन में वेजाइनल वॉश का इस्तेमाल कर रही थी. उसे नहीं पता था कि ज़्यादा सफ़ाई करने से शरीर का नेचुरल डिफेंस सिस्टम खराब हो जाता है. उसे यह भी नहीं पता था कि इंटीमेट वॉश से UTI का खतरा बढ़ सकता है. वह बस ‘साफ़’ रहना चाहती थी. साफ़ रहने का मतलब हमेशा सुरक्षित रहना नहीं होता है. यह जानना जरूरी है कि UTI हमेशा गंदगी से नहीं होता है. अगर इस कहानी ने आपको डरा दिया है, तो यही मकसद था. क्योंकि अगली बार यह आपके किसी अपने के साथ हो सकता है.”

वेजाइनल वॉश कितने खतरनाक होते हैं?

वेजाइनल वॉश का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है क्योंकि ये वजाइना के नेचुरल pH बैलेंस और हेल्दी बैक्टीरिया (लैक्टोबैसिली) को बिगाड़ सकते है. इससे बैक्टीरियल वेजिनोसिस (BV), यीस्ट इन्फेक्शन (थ्रश) और UTI जैसे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, और जलन और सूखापन भी हो सकता है. इसलिए इनका रेगुलर और अंदरूनी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. सिर्फ़ बाहरी हिस्से (वल्वा) को गुनगुने पानी और हल्के साबुन से साफ करना चाहिए, और कोई भी नया प्रोडक्ट डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए.

UTI के लक्षण क्या हैं?

UTI के पहले लक्षण आमतौर पर पेशाब की समस्याएं होती है. इसके अलावा लक्षणों में यूरिनरी ट्रैक्ट और ब्लैडर की लाइनिंग में सूजन, पेशाब करते समय दर्द या जलन, बार-बार पेशाब आना, बदबूदार पेशाब, पेशाब में खून, पेट के निचले हिस्से में दर्द, हल्का बुखार, कभी-कभी ठंड लगना और मतली शामिल है.

UTI इन्फेक्शन से कैसे बचें

1. टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हमेशा अपने प्राइवेट पार्ट्स को आगे से पीछे की ओर अच्छी तरह पोंछें. यह आदत E. coli बैक्टीरिया को गुदा से यूरिनरी ट्रैक्ट में जाने के खतरे को कम करती है.

2. अगर आप दिन भर खूब पानी पीते हैं, तो सारे बैक्टीरिया पेशाब के साथ बाहर निकल जाते है. इसलिए महिलाओं को खूब पानी पीने की आदत डालनी चाहिए.

3. अगर आपको पेशाब करने की इच्छा हो, तो उसे रोकें नहीं, हर 3 से 4 घंटे में पेशाब करें. गर्भवती महिलाओं को इस पर खास ध्यान देने की जरूरत है.

4. सेक्सुअल एक्टिविटी के बाद UTI का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसलिए सेक्स से पहले और बाद में टॉयलेट जाकर पेशाब करें. अगर हो सके, तो अपने प्राइवेट पार्ट्स को पानी से भी साफ करें.

5. पीरियड्स के दौरान, खुशबूदार पैड या टैम्पोन के बजाय रेगुलर पैड इस्तेमाल करना आपकी सेहत के लिए बेहतर है. साथ ही अपने प्राइवेट पार्ट्स के आस-पास खुशबू वाले पाउडर, डियोड्रेंट स्प्रे, खुशबू वाले साबुन या खुशबू वाले तेल का इस्तेमाल करने से बचें.

6. अपनी डाइट में दही और फर्मेंटेड फूड जैसे प्रोबायोटिक फूड शामिल करें. ये आपकी आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाएंगे, जो आपको इन्फेक्शन से बचाने में मदद करेंगे.

7. क्रैनबेरी UTI को रोकने में बहुत असरदार फल है. इनका इस्तेमाल सदियों से घरेलू नुस्खों में किया जाता रहा है. इनमें कई ऐसे तत्व होते हैं जो UTI इन्फेक्शन की संभावना को कम करते है.

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