UGC New Guideline: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी UGC देश की हायर एजुकेशन व्यवस्था को देखती है. ये यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को फंड देती है, पढ़ाई की गुणवत्ता के नियम तय करती है और संस्थानों पर निगरानी रखती है.
13 जनवरी 2026 को UGC ने इक्विटी प्रमोशन रेगुलेशंस 2026 लागू किए. ये नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे. इनका उद्देश्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह के भेदभाव को रोकना बताया गया है. इन नियमों के तहत जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव को गलत माना जाएगा. खास फोकस SC, ST, OBC, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांग छात्रों पर है.
UGC को नए नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
इन नियमों की जड़ 2016 का रोहित वेमुला केस है. हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद देशभर में जातिगत भेदभाव पर सवाल उठे थे. ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. कोर्ट ने रोहित वेमुला और पायल तडवी केस को आधार बनाकर UGC को निर्देश दिया कि वो पुराने नियमों को हटाकर नए, सख्त नियम बनाए. इसी आदेश के तहत 2026 की नई गाइडलाइन आई है.
नई UGC गाइडलाइन के मेन नियम क्या हैं?
नई गाइडलाइन के अनुसार हर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट को:
एक इक्विटी कमिटी बनानी होगी, जिसमें SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग प्रतिनिधि होंगे.
इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाना जरूरी होगा.
कैंपस में इक्विटी स्क्वाड और इक्विटी एम्बेसडर तैनात किए जाएंगे.
24×7 हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत सिस्टम होगा.
शिकायत मिलने के 24 घंटे में कार्रवाई शुरू करनी होगी.
60 दिनों में जांच पूरी करनी होगी.
जनरल कैटेगरी के छात्र क्यों विरोध कर रहे हैं?
जनरल कैटेगरी के छात्रों और कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं. उनका मानना है कि:
नियम ये मानकर चलते हैं कि जनरल कैटेगरी के लोग भेदभाव के शिकार नहीं हो सकते.
झूठी शिकायतों पर कोई सजा तय नहीं की गई है.
आरोपी को शुरुआत से ही दोषी मानने जैसा माहौल बनता है.
सही प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच की गारंटी साफ नहीं है.
गलत शिकायत से करियर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.
इसी वजह से इसे कुछ लोग ‘नई तरह का संस्थागत भेदभाव’ कह रहे हैं.
गाइडलाइन लागू होने के बाद कॉलेजों को क्या करना होगा?
15 जनवरी 2026 से ये नियम लागू हो चुके हैं. इसके बाद:
90 दिनों के भीतर सभी संस्थानों को कमिटी बनानी होगी.
शिकायत पर 24 घंटे में प्राथमिक कार्रवाई जरूरी होगी.
15 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी.
हर शिकायत का रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा.
नियम न मानने पर कॉलेज पर क्या कार्रवाई होगी?
अगर कोई कॉलेज या यूनिवर्सिटी इन नियमों का पालन नहीं करती, तो UGC उसकी मान्यता रद्द कर सकता है और सरकारी फंड रोका जा सकता है.
किसी छात्र पर शिकायत होने पर क्या होगा?
शिकायत मिलने पर:
इक्विटी कमिटी जांच करेगी.
संस्थान प्रमुख को रिपोर्ट सौंपी जाएगी.
पहले चेतावनी, फिर जुर्माना.
गंभीर मामलों में निष्कासन तक हो सकता है.