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Victorian Disease: विक्टोरियन रोग उन पुरानी बीमारियों को कहा जाता है जो इंग्लैंड के विक्टोरियन युग यानी 1800 के दशक में बहुत आम थीं और गरीबी, कुपोषण, भीड़भाड़ और अस्वच्छ जीवन स्थितियों के कारण तेजी से फैलती थीं.
आधुनिक दवाइयों, टीकाकरण और पौष्टिक भोजन के चलते ये रोग लगभग खत्म हो गए थे, लेकिन हाल के वर्षों में फिर से सामने आने लगे हैं. इन बीमारियों में रिकेट्स, स्कर्वी, ट्यूबरकुलोसिस (क्षय रोग), काली खाँसी, स्कार्लेट फीवर और गाउट जैसी समस्याएँ प्रमुख रूप से शामिल हैं.
विटामिन D की कमी के कारण होती है रिकेट्स
रिकेट्स आमतौर पर बच्चों में विटामिन D की कमी के कारण होता है जिसमें हड्डियाँ कमजोर होकर टेढ़ी दिखाई देने लगती हैं. स्कर्वी विटामिन C की कमी से उत्पन्न होता है और इसके लक्षणों में मसूड़ों से खून आना, लगातार थकान, और शरीर पर आसानी से चोट लगना शामिल है. टीबी में मरीज को कई सप्ताह तक लगातार खाँसी रहती है, वजन तेजी से घटता है और रात में पसीना आता है. काली खाँसी में बच्चों और बड़ों दोनों में गले से जोरदार खाँसी उठती है और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज सुनाई देती है, जबकि स्कार्लेट फीवर में तेज बुखार, गले में दर्द और शरीर पर लाल दाने उभर आते हैं.
इन रोगों का निदान
इन रोगों का निदान डॉक्टर शारीरिक जाँच, रक्त परीक्षण, एक्स-रे, थूक परीक्षण और गला-नाक स्वाब के माध्यम से करते हैं, जिससे विटामिन की कमी, बैक्टीरिया या संक्रमण की सही पहचान हो सके. रोकथाम के उपाय बेहद सरल हैं—सबसे पहले संतुलित आहार लेना जरूरी है जिसमें विटामिन C के लिए संतरा, नींबू और आंवला, तथा विटामिन D और कैल्शियम के लिए धूप, दूध, दही, अंडा और दालें शामिल हों. इसके साथ ही बच्चों का टीकाकरण समय पर पूरा होना चाहिए ताकि काली खाँसी और टीबी जैसे संक्रमणों से सुरक्षा मिल सके. साफ-सफाई, स्वच्छ पानी और भीड़भाड़ वाले स्थानों से संयम भी महत्वपूर्ण हैं.
यदि खाँसी लंबे समय तक बनी रहे, शरीर कमजोर दिखे या बुखार बार-बार आए तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. कुल मिलाकर Victorian Diseases आज भी लौट रही हैं, लेकिन सही पोषण, जागरूकता और समय पर इलाज से इन्हें पूरी तरह रोका और नियंत्रित किया जा सकता है.