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अब 10 मिनट में नहीं होगी सामान की डिलीवरी, केंद्र सरकार की सलाह के बाद लगी रोक, ब्लिंकिट सहित सभी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने हटाए टैगलाइन

10 Minute Delivery News: केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें गिग वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त डिलीवरी टाइम लिमिट को हटाने की सलाह दी. इसके बाद ब्लिंकिट सहित क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने इस टैगलाइन को हटा दिए हैं.

By: Hasnain Alam | Last Updated: January 13, 2026 4:15:00 PM IST



10 Minute Delivery Ban: केंद्र सरकार ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की ओर से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने गिग वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिलीवरी के लिए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को टाइम लिमिट को हटाने की सलाह दी है. इसके बाद ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी जैसी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने 10 मिनट में डिलीवरी वाली टैगलाइन को हटा दिया है.

ऐसे में अब ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी जैसी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स अब अपने ग्राहकों से यह वादा नहीं करेंगी कि सामान सिर्फ 10 मिनट में पहुंच जाएगा. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों के साथ बैठक की है और उन्हें गिग वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त डिलीवरी टाइम लिमिट को हटाने की सलाह दी.

अब 10 मिनट की टाइमलाइन नहीं होगी फिक्स

इसके बाद कंपनियों ने भी सरकार को कहा कि वे डिलीवरी टाइम लिमिट को अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा देंगे. केंद्रीय मंत्री की सलाह के बाद ब्लिंकिट ने तत्काल प्रभाव के कदम उठाते हुए 10-मिनट डिलीवरी क्लेम को अपने ब्रांड प्लेटफॉर्म से हटा दिया. कंपनी अब डिलीवरी के लिए 10 मिनट की टाइमलाइन को फिक्स नहीं करेगी.

बैठक में यह कहा गया कि 10 मिनट का सख्त समय सीमा डिलीवरी वालों पर इतना दबाव डालता है कि वे तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हैं, ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं और कई बार अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं. मंत्री मनसुख मांडविया ने कंपनियों से कहा कि ग्राहकों को तेज सर्विस अच्छी लगती है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों की जान और सेहत से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.

राघव चड्ढा ने संसद में उठाया था ये मुद्दा

बता दें कि हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में आम आदमी पार्टी के के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था. उन्होंने कहा था कि देश के लाखों गिग वर्कर्स भीषण गर्मी, बारिश और ठंड में काम करते हैं, फिर भी उन्हें जबरन टारगेट पूरा करने का दबाव झेलना पड़ता है.

बीते सोमवार को चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे राजधानी की सड़कों पर एक डिलीवरी पार्टनर के रूप में एक दिन बिताते हुए दिखाई दे रहे हैं. यह वीडियो उन्होंने गिग वर्करों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए बनाया था.

यही नहीं हाल ही में नए साल के अवसर पर क्विक कॉमर्स डिलीवरी पार्टनर्स ने कठिन काम करने की परिस्थितियों, कम वेतन और प्रतिकूल माहौल के चलते हड़ताल की थी.

गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए लागू हो चुका है नया कानून

हालांकि, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के रूप में पहली बार ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ के लिए कानून 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है. इस कानून के तहत गिग वर्कर्स को जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है.

इसके लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा, जिससे इन कल्याणकारी योजनाओं को फंडिंग मिल सके. साथ ही, गिग वर्कर्स के हितों के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का भी गठन होगा.

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