Frequent Urination: बार-बार पेशाब आना या बहुत ज्यादा पेशाब करना ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर के अंदर होने वाले बदलावों का संकेत हो सकता है. सामान्य रूप से कोई व्यक्ति दिन में 5 से 8 बार तक पेशाब कर सकता है, जो तरल पदार्थ की मात्रा, मौसम, शारीरिक गतिविधि और शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है.
बार-बार पेशाब आना असामान्य इशारा
लेकिन यदि पेशाब की आवृत्ति अचानक बढ़ जाए, रात में बार-बार उठना पड़े, या पेशाब करने की तीव्र इच्छा लगातार बनी रहे, तो वे संकेत हो सकते हैं कि शरीर कुछ असामान्य इशारा दे रहा है. बार-बार पेशाब के कारण कई हो सकते हैं—सबसे सामान्य कारण हैं अधिक पानी या चाय-कॉफी पीना, ठंडा मौसम, तनाव या दवाओं का प्रभाव.
जलन हो, रंग बदल जाए, बदबू आए – तो मामला गंभीर
जब बिना स्पष्ट कारण पेशाब की मात्रा बढ़ जाए, पेशाब करते समय जलन हो, रंग बदल जाए, बदबू आए, या कमर तथा पेट में दर्द महसूस हो, तो मामला गंभीर हो सकता है. एक बड़ा कारण है UTI यानी मूत्र संक्रमण, जो खासतौर पर महिलाओं में आम है. इसमें बैक्टीरिया मूत्रमार्ग में संक्रमण पैदा करते हैं, जिससे पेशाब बार-बार आने की इच्छा, दर्द, जलन और कभी-कभी बुखार हो सकता है. समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण किडनी तक फैल सकता है.
बार-बार पेशाब आना डायबिटीज का भी एक महत्वपूर्ण संकेत है. शरीर में शुगर बढ़ने पर किडनी ग्लूकोज को बाहर निकालने के लिए पानी खींचती हैं, जिससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है. इसका साथ अतिरिक्त प्यास लगना, थकान और अचानक वजन घटना जैसे लक्षण भी दिखते हैं.
ओवरऐक्टिव ब्लैडर भी एक आम कारण है. इसमें मूत्राशय अनियंत्रित रूप से सिकुड़ता है और व्यक्ति को तुरंत और बार-बार पेशाब की इच्छा होती है. यह स्थिति उम्र बढ़ने, नसों के कमजोर होने या प्रसव जैसी परिस्थितियों में अधिक देखी जाती है.
किडनी बीमारी से जुड़ी हुई समस्या
लेकिन जब यह समस्या किडनी बीमारी से जुड़ी हो, तब संकेत और गंभीर हो जाते हैं—जैसे पेशाब का झागदार, धुंधला या लाल होना, शरीर में सूजन (विशेषकर आंखों के नीचे और टखनों पर), भूख कम होना, मतली, थकान, कमर में दर्द और हाई ब्लड प्रेशर. किडनी जब खून को ठीक से फिल्टर नहीं कर पातीं, तो शरीर में अपशिष्ट जमा होने लगते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है.
समय पर पहचान और इलाज न मिले तो यह क्रॉनिक किडनी डिजीज में बदल सकता है, जिसका अंत डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण तक पहुंच सकता है. इसलिए बार-बार पेशाब को केवल सामान्य आदत मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए.
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क
यदि रात में दो बार से ज्यादा पेशाब के लिए उठना पड़े, पेशाब रोकना मुश्किल हो, डायपर या पैड की जरूरत महसूस हो, या पेशाब के साथ दर्द, बुखार, खून या वजन घटने जैसे लक्षण आएं—तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट, शुगर और सोनोग्राफी आसानी से स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं.
सही इलाज के साथ—पानी नियंत्रित मात्रा में पीना, सोने से पहले तरल कम लेना, कैफीन-अल्कोहल सीमित करना, निजी स्वच्छता बनाए रखना और अधिक नमक-शुगर से बचना—इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
कुल मिलाकर, बार-बार पेशाब आना कभी सामान्य आदत होता है और कभी गंभीर बीमारी का संकेत. फर्क बस इतना है कि हम शरीर के दिए संकेतों को पहचानते हैं या नजरअंदाज कर देते हैं.
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