Home > खेल > ‘गद्दार हैं शाहरुख खान’, आखिर क्यों धर्मगुरु और राजनेता पड़ गए King Khan के पीछे; जानें किस-किसने बोले तीखे बोल

‘गद्दार हैं शाहरुख खान’, आखिर क्यों धर्मगुरु और राजनेता पड़ गए King Khan के पीछे; जानें किस-किसने बोले तीखे बोल

IPL Mustafizur Rahman: मार्च 2026 में IPL शुरू होने से पहले बॉलीवुड सुपरस्टार और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के को-ओनर शाहरुख खान एक बड़े विवाद में फंस गए हैं. वजह है बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान, जिन्हें KKR ने अपनी टीम में खरीदा है.

By: Heena Khan | Published: January 2, 2026 1:31:51 PM IST



Shahrukh Khan Controversy: मार्च 2026 में IPL शुरू होने से पहले बॉलीवुड सुपरस्टार और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के को-ओनर शाहरुख खान एक बड़े विवाद में फंस गए हैं. वजह है बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान, जिन्हें KKR ने अपनी टीम में खरीदा है. इस फैसले के बाद शाहरुख खान पर कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं. कुछ नेताओं और धार्मिक गुरुओं ने उनके खिलाफ कड़े बयान दिए हैं और उन्हें “गद्दार” तक कह दिया गया है. वहीं, कुछ राजनीतिक नेता शाहरुख खान के समर्थन में भी सामने आए हैं और कहा है कि खेल को राजनीति या धर्म से जोड़ना गलत है. यह विवाद तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना हुआ है.

धार्मिक नेताओं के तीखे बयान

इस मामले में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शाहरुख खान की खुलकर आलोचना की है. स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि शाहरुख खान कोई हीरो नहीं हैं और उनके काम गद्दार जैसे हैं. वहीं, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया और कहा कि वहां के खिलाड़ियों को इस पर आवाज उठानी चाहिए. इससे पहले धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने भी शाहरुख खान पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिस देश ने उन्हें इतना प्यार और पहचान दी, उसी देश में एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को लाकर खिलाना क्या सही है. इन बयानों के बाद मामला और ज्यादा गरमा गया.

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राजनीतिक प्रतिक्रिया और समर्थन

इस विवाद में राजनीति भी पूरी तरह से शामिल हो गई है. सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम ने कहा कि शाहरुख खान द्वारा मुस्तफिजुर रहमान को खरीदना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दूसरी ओर, भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि किसी को भी देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने का अधिकार नहीं है. वहीं, महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन प्यारे खान ने देवकीनंदन ठाकुर के बयान का समर्थन किया और कहा कि जहां अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं होते, वो देश आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखेंगे. कुल मिलाकर, एक खिलाड़ी की खरीद से शुरू हुआ यह मामला अब धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक बहस में बदल चुका है.

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