BJP-led Mahayuti’s BMC manifesto promises AI to track Bangladeshi, Rohingya migrants: महायुति ने बीएमसी चुनाव 2026 के लिए अपना घोषणापत्र जारी करते हुए अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान के लिए AI तकनीक के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. इसके साथ ही, पानी के टैक्स में 5 साल तक कोई बढ़ोतरी न करने, महिलाओं को बस किराए में 50 प्रतिशत छूट के साथ-साथ बड़े पैमाने पर आवास निर्माण जैसे तमाम वादों के जरिए मुंबईवासियों को रिझाने की पूरी तरह से एक नई कोशिश की जा रही है.
बीएमसी चुनाव के लिए घोषणापत्र
महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति यानी बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी गठबंधन ने आगामी बीएमसी चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र ‘वचननामा’ जारी कर दिया है. जानकारी के मुताबिक, इसमें सबसे चर्चा का विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अवैध प्रवासियों की पहचान करने का वादा किया जा रहा है.
AI के जरिए अब होगी पहचान?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान करने के लिए एक खास AI टूल का विकसित किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए आगे बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य मुंबई को “घुसपैठियों से पूरी तरह से मुक्त” बनाना है.
क्या पानी के बिल पर लगेगी रोक?
इतना ही नहीं, महायुति ने यह भी वादा करते हुए कहा कि अगले 5 सालों तक मुंबईवासियों के लिए पानी के टैक्स (Water Tax) में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की जाएगी.
महिलाओं को बस किराए में मिलेगा छूट
तो वहीं, मुख्यमंत्री ने बताया कि महिलाओं के लिए BEST बसों के किराए में 50 प्रतिशत की छूट और स्वयं सहायता समूहों के लिए 5 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त करने का हमने वादा किया है.
स्लम मुक्त बनाने का लक्ष्य पर दिया ज़ोर
इसके अलावा महायुति गठबंधन ने मुंबई को ‘स्लम-मुक्त’ बनाने के लक्ष्य के साथ-साथ 30-35 लाख घरों के निर्माण और धारावी पुनर्विकास में 350 वर्ग फुट के घर देने का भी एक बेहद ही महत्वपूर्ण वादा किया है.
पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्याने देने की बात
पर्यावरण संरक्षण के लिए 17 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित करने और 2029 तक BEST बसों के बेड़े को पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने का भी एक लक्ष्य तय करने के बार में भी जानकारी दी है.
मराठी पहचान के साथ मराठी कला केंद्रों की स्थापना
नगर निगम में एक अलग मराठी भाषा विभाग और मराठी कला केंद्रों की स्थापना का भी वादा किया गया है ताकि स्थानीय संस्कृति को इसका एक तरह से बढ़ावा मिल सके.

