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SCO शिखर सम्मेलन क्या है? जहां PM मोदी समेत इन बड़े नेताओं का लग रहा जमावड़ा, US की बढ़ रही टेंशन!

SCO summit in China: एससीओ विश्व की 43% आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के 23% का प्रतिनिधित्व करता है।

Published by Ashish Rai

What is sco summit: एससीओ यानि शंघाई सहयोग संगठन का 25वां शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक उत्तरी चीनी बंदरगाह शहर तियानजिन में आयोजित हो रहा है। बता दें, यह सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा एससीओ शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें 20 से अत्यधिक देशों के नेता और 10 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। इस आयोजन को चीन के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां वह ग्लोबल साउथ को साथ लाने और पश्चिम, विशेष रूप से अमेरिका, के दबदबे को संतुलित करने की अपनी भूमिका को प्रदर्शित करेगा।

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कौन-कौन शामिल हो रहा है?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेंगे और राष्ट्राध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक तथा “एससीओ प्लस” बैठक की अध्यक्षता करेंगे। शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख नेता इस प्रकार हैं:

  • भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
  • ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
  • बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको
  • कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायव
  • उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शव्कत मिर्ज़ियोयेव
  • किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जपारोव
  • ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन

इसके अलावा, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, म्यांमार के सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू भी शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और आसियान महासचिव काओ किम हॉर्न भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

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एससीओ शिखर सम्मेलन क्या है?

बता दें, एससीओ की शुरुआत 1996 में “शंघाई फाइव” के रूप में हुई थी, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल थे, इसका उद्देश्य शीत युद्ध के बाद सीमा विवादों को खत्म करना था। साल 2001 में उज्बेकिस्तान के सम्मिलित होने के साथ यह संगठन एससीओ के रूप में विकसित हुआ। साल 2017 में भारत और पाकिस्तान, 2023 में ईरान, और साल 2024 में बेलारूस इसके पूर्ण मेंबर बने। इस संगठन में 14 डायलॉग पार्टनर भी हैं, इनमें मिस्र, सऊदी अरब, म्यांमार, तुर्की, श्रीलंका और कंबोडिया सम्मिलित हैं।

एससीओ विश्व की 43% आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के 23% का प्रतिनिधित्व करता है। अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हांगकांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलेजांद्रो रेयेस का मानना है कि संगठन का विजन और पहचान अभी भी अस्पष्ट है। भारत के तक्षशिला इंस्टीट्यूशन के मनोज केवलरमानी ने कहा कि एससीओ अभी भी अपनी पहचान तलाश रहा है, जो “अविभाज्य सुरक्षा” के सिद्धांत के इर्द-गिर्द बन रही है। यह सिद्धांत नाटो की ब्लॉक-आधारित सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा के उल्ट है, जिसमें सभी राष्ट्रों के हितों को ध्यान में रखने की बात होती है।

इस शिखर सम्मेलन की विशेषता क्या है?

यह शिखर सम्मेलन कई वजहों से महत्वपूर्ण है। यह रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़राइल-गाज़ा संघर्ष, दक्षिण एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा छेड़े गए वैश्विक व्यापार युद्ध के दौरान हो रहा है। यह शिखर सम्मेलन एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ते विश्व को प्रदर्शित करेगा, जहाँ चीन और रूस “अविभाज्य सुरक्षा” को बढ़ावा देंगे।

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