US Iran Tension: कई रिपोर्ट्स के हवाले से बुधवार को बताया गया कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और ईरान से खतरे के बीच एहतियात के तौर पर अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने मुख्य ठिकानों से सैनिकों को हटा रहा है. एक अमेरिकी अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि कतर के एक मुख्य बेस से कई कर्मचारियों को बुधवार शाम तक जगह खाली करने की सलाह दी गई थी.
यह घटनाक्रम तब हुआ जब अमेरिका की धमकियों के जवाब में ईरान ने बुधवार को पहले कहा था कि उसने अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले पड़ोसी देशों को चेतावनी दी थी कि अगर वाशिंगटन हमला करता है तो वह अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेगा.
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया एहतियाती कदम (US officials said these were precautionary measures)
अधिकारियों का हवाला देते हुए एक AFP रिपोर्ट में कहा गया है कि कतर के अल उदीद मिलिट्री बेस पर तैनात कर्मचारियों को वहां से जाने के लिए कहा गया था. कतर में मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा अमेरिकी मिलिट्री बेस है.अल उदीद एयर बेस पर इस कदम को अमेरिकी अधिकारियों ने एहतियाती कदम बताया है. हालांकि, इसको लेकर अधिकारी ने इस कदम के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी, जिसमें यह भी शामिल है कि जगह खाली करना वैकल्पिक था या अनिवार्य. इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कतर ने कहा कि ऐसे कदम मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के जवाब में उठाए जा रहे हैं.
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कतर ने क्या कहा? (What did Qatar say?)
इस पूरे घटनाक्रम पर कतर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. कतर के मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि IMO इस बात की पुष्टि करता है कि कतर राज्य अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक उपायों को लागू करना जारी रखेगा, जिसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं की सुरक्षा से संबंधित कार्रवाई शामिल हैं.
ईरान ने दी थी ये चेतावनी (Iran had issued this warning)
इससे पहले दिन में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले अपने पड़ोसियों को चेतावनी दी थी कि अगर वाशिंगटन हमला करता है तो वह अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेगा. यह चेतावनी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से “विरोध जारी रखने” के लिए कहा और उनसे अपने संस्थानों पर कब्जा करने के लिए कहा. यह टिप्पणी ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की अटकलों को बढ़ाती है क्योंकि देश हाल के इतिहास में सबसे खराब अशांति में से एक का सामना कर रहा है.
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, विरोध प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 लोगों तक पहुंच गई है.

