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हमारे पास थे सिर्फ 30-45 सेकंड… PAK से नहीं निकल रहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का खौफ, पीएम शहबाज के करीबी का भारतीय ब्रह्मोस को लेकर नया कबूलनामा

इंटरव्यू में सनाउल्लाह ने आगे कहा कि जब भारत ने ब्रह्मोस दागा और वह नूर खान एयरबेस पर गिरा तो पाकिस्तान सरकार के पास यह तय करने के लिए सिर्फ 30-45 सेकंड का समय था कि यह हमला परमाणु है या नहीं।

Published by Shubahm Srivastava

Nur Khan Airbase Strike News : भारत द्वारा आतंकियों के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का खौफ खत्म होता नहीं दिख रहा है। 57 दिन बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान के कई बड़े नेताओं के मन में इसका खौफ साफ दिखाई दे रहा है। इसे लेकर बीच-बीच में कई खुलासे हो रहे हैं। अब प्रधानमंत्री के विशेष सहायक राणा सनाउल्लाह खान ने माना है कि भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमले ने उनके देश की नींव हिला दी थी। उन्होंने माना कि इस हमले ने पाकिस्तान को ऐसी स्थिति में डाल दिया था कि कुछ ही सेकंड बाद परमाणु युद्ध हो सकता था।

राणा सनाउल्लाह ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित मध्यस्थता ने स्थिति को परमाणु युद्ध में बदलने से रोक दिया। इससे साफ है कि पाकिस्तान यहां नई चाल चल रहा है। क्योंकि भारत हमेशा से कहता रहा है कि वह पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। न ही भारतीय नेता हर छोटे-मोटे विवाद पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देते रहते हैं। भारत की नीति को नजरअंदाज करके पाकिस्तान ने एक बार फिर दुनिया के सामने परमाणु भय की वही पुरानी कहानी दोहराई है।

नूर खान एयरबेस पर गिरी ब्रह्मोस, पाक के पास थे सिर्फ 30-45 सेकंड

इंटरव्यू में सनाउल्लाह ने आगे कहा कि जब भारत ने ब्रह्मोस दागा और वह नूर खान एयरबेस पर गिरा तो पाकिस्तान सरकार के पास यह तय करने के लिए सिर्फ 30-45 सेकंड का समय था कि यह हमला परमाणु है या नहीं। इतने कम समय में ऐसा फैसला लेना बेहद खतरनाक है। सनाउल्लाह ने आगे कहा, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत ने परमाणु हथियार न भेजकर सही काम किया। लेकिन इससे गलतफहमी पैदा हो सकती थी, जिससे विनाशकारी परमाणु युद्ध हो सकता था। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि इसके बाद कितनी तबाही हो सकती थी।

पाकिस्तानी वायुसेना की रीढ़ है नूर खान एयरबेस

सनाउल्लाह के बयान से साफ हो गया है कि भारतीय हमले के बाद पाक के पास घूटने टेकने के अलावा और कोई ऑप्शन मौजूद नहीं था। बता दें कि नूर खान एयरबेस को पाकिस्तानी वायुसेना की रीढ़ है। जहां से खास मिशनों, एयर रिफ्यूलिंग, और रणनीतिक ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन्स को अंजाम दिया जाता है. यहीं पास में स्थित है पाकिस्तान की स्ट्रैटजिक प्लान्स डिवीजन का हेडक्वार्टर जो पूरे परमाणु जखीरे की निगरानी करता है।

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इसके अलावा नूर खान एयरबेस इस्लामाबाद से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है। यह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा और परिवहन का मुख्य केंद्र माना जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं पर सवाल उठाए।

सनाउल्लाह ने दावा किया कि उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में डोनाल्ड ट्रंप ने ‘हीरो’ की भूमिका निभाई थी और इस काम के लिए उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने ट्रंप के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग भी की है। हालांकि, भारत पहले ही कह चुका है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम की मांग के बाद हुआ।

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