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क्या पाकिस्तान पर अलग से हुकूमत चला रहे हैं CDF असीम मुनीर? अब इस क्षेत्र में भी हुई सेना की एंट्री, जानें- क्या हुआ ‘खेल’?

Pakistan Latest News: फौजी फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड 1978 में बनी पाकिस्तान की एक खाद निर्माता कंपनी है. ये फौजी फाउंडेशन का एक हिस्सा है, जो पाकिस्तान सेना से जुड़ा है. बिडिंग प्रक्रिया का हिस्सा कुल चार कंपनियां थीं. इनमें से आखिरी समय पर एफएफपीएल ने खुद को अलग कर लिया.

Published by Hasnain Alam

Pakistan News: पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों कई परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं. साथ ही पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज असीम मुनीर एक अलग ही हुकूमत चला रहे हैं. ताजा खबर यह है कि पाकिस्तानी सेना ने बैकडोर से पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस में एंट्री मार ली है.

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक आरिफ हबीब कंसोर्टियम ने फौजी फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड के उसके कंसोर्टियम में शामिल होने का ऐलान कर दिया है. आरिफ हबीब ने पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस की निजीकरण प्रक्रिया के लिए हुई नीलामी में 135 अरब रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर पीआईए में 75 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की है.

गुरुवार को जारी अपने बयान में कंसोर्टियम ने कहा- “यह पार्टनरशिप एयरलाइन को फाइनेंशियल सपोर्ट और कॉर्पोरेट विशेषज्ञता देगी. साथ ही फौजी फर्टिलाइजर भी आरिफ हबीब कंसोर्टियम के साथ प्रबंधन का हिस्सा होगी. इसके तहत कंसोर्टियम पहले साल में ग्राउंड ऑपरेशंस और ओवरऑल सर्विसेज को अपग्रेड करने के लिए 125 अरब रुपये का निवेश करेगा.

सेना से क्या रिश्ता है?

ऐसे में सभी के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसका सेना से क्या रिश्ता है? दरअसल, एफएफपीएल 1978 में बनी पाकिस्तान की एक खाद निर्माता कंपनी है. ये फौजी फाउंडेशन का एक हिस्सा है, जो पाकिस्तान सेना से जुड़ा है. बिडिंग प्रक्रिया का हिस्सा कुल चार कंपनियां थीं. इनमें से आखिरी समय पर एफएफपीएल ने खुद को अलग कर लिया. इसकी वजहें कई थीं.

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इसके बाद आरिफ हबीब कंसोर्टियम ने सरकार की सोच से ज्यादा की बोली लगाई. आरिफ हबीब कंसोर्टियम ने कुल 4320 करोड़ की बोली लगाई, जबकि सरकार ने 3200 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था, ऐसे में उसे 1320 करोड़ रुपये ज्यादा मिले. इतना निश्चित तौर पर एफएफपीएल नहीं कर सकती थी.

सीडीएफ आसिम मुनीर का टूट जाता सपना

दूसरा बात यह है कि तय नियमों के अनुसार हारी हुई कंपनी पीआईए मैनेजमेंट में भी शामिल नहीं हो पाती. अगर ऐसा होता तो हाल ही में सीडीएफ बने आसिम मुनीर का उड्डयन क्षेत्र में दखलअंदाजी का सपना टूट जाता.

दरअसल, निजीकरण की राह आईएमएफ के सहारे ही पकड़ी जा रही है. अब अगर सेना इसमें हिस्सा लेती तो गलत संदेश जाता, क्योंकि नीलामी की शर्तों के अनुसार प्राइवेट कंपनी ही हिस्सेदारी खरीद सकती थी. बिडिंग में हार और गेम से बाहर होने का खौफ सबसे ज्यादा था.

वहीं एक बार आउट होने का मतलब किसी भी रूप में वापसी से चूकना था. बस मुनीर ने वापसी का रास्ता अपने कंट्रोल में रखा, क्योंकि नीलामी का एक नियम ये भी था कि जीती हुई कंपनी चाहे तो किसी के भी साथ गठबंधन कर सकती है.

Hasnain Alam
Published by Hasnain Alam

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