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ईरान के सेना प्रमुख ने असीम मुनीर को फोन कर कही ऐसी बात, बढ़ गई भारत की टेंशन! हर तरफ हो रहा है चर्चा

:इजरायल से युद्ध के बाद ईरान के सेना प्रमुख जनरल मोसावी उन देशों का शुक्रिया अदा कर रहे हैं, जिन्होंने युद्ध में ईरान की मदद की। इस सिलसिले में मोसावी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से फोन पर बात की है।

Published by Divyanshi Singh

Iran-Pakistan:इजरायल से युद्ध के बाद ईरान के सेना प्रमुख जनरल मोसावी उन देशों का शुक्रिया अदा कर रहे हैं, जिन्होंने युद्ध में ईरान की मदद की। इस सिलसिले में मोसावी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से फोन पर बात की है। मोसावी ने मुनीर को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है।दिलचस्प बात यह है कि दोनों देशों के बीच युद्ध में मुनीर ईरान के पड़ोसी देश के एकमात्र जनरल थे, जिन्होंने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में ट्रंप ने मुनीर को ईरान के मामले में ज्यादा समझदार बताया था।

अमेरिका का पुराना चेला

ईरान भले ही पाकिस्तान को अपना मददगार मान रहा हो, लेकिन पाकिस्तान अमेरिका का पुराना चेला है। अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान ने कई देशों में आतंक फैलाया है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस बात को स्वीकार किया था।आसिफ के मुताबिक, 1990 के दशक में अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों को पाला-पोसा। इतना ही नहीं, जब अमेरिका अफगानिस्तान में लड़ने गया, तो पाकिस्तान ने उसकी मदद की।

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पाकिस्तान की मदद नहीं की

ईरान ने युद्ध में पाकिस्तान की मदद नहीं की। बयान जारी करने के अलावा. पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी देश है और दोनों के बीच सीमा करीब 909 किलोमीटर है. पाकिस्तान ने न तो ईरान के लोगों के लिए अपनी सीमा खोली और न ही उनकी मदद के लिए कोई बड़ा ऐलान किया.उल्टे जब ईरान ने कतर पर मिसाइल दागी तो उसने इसकी निंदा की. ईरान की न्यूज एजेंसी मेहर न्यूज ने संपादकीय के जरिए पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों पर निशाना साधा है. एजेंसी ने लिखा कि पड़ोसी का पहला कर्तव्य होता है कि जब किसी के घर में आग लगे तो पानी लेकर जाए, लेकिन ईरान के पड़ोसियों ने ऐसा नहीं किया.

कही हो ना जाए अफगानिस्तान वाला हाल

ईरान ने भले ही फिलहाल पाकिस्तान को मददगार मान लिया हो, लेकिन भविष्य में यह उसे महंगा पड़ सकता है. इसका ताजा उदाहरण अफगानिस्तान है. अफगानिस्तान कभी पाकिस्तान का सबसे भरोसेमंद सहयोगी था. कई मौकों पर अफगान लड़ाकों ने पाकिस्तान की मदद की.लेकिन अब पाकिस्तान अफगान सरकार को ही किनारे लगाने में लगा हुआ है. उसकी सीमाएं बंद कर दी गई हैं. वहीं अफगानिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लग रहा है.

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