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हजारों साल बाद पता चला नेपोलियन की मौत की असली वजह, ऐसे उठा मृत्यु से पर्दा

नेपोलियन की "ग्रैंड आर्मी" की 1812 की तबाही की Mystery अभ आखिरकार सुलझ चुकी है. DNA Analysis में टाइफस के अलावा Mass Grave में Salmonella enterica enterica (पैराटाइफाइड) और (Relapsing Fever) नाम के दो नए Deadly Bacteria पाए गए हैं. Researchers ने जानकारी देते हुए बताया कि Four Infections और ठंड Disaster ही असली वजह थी.

Published by DARSHNA DEEP

Napolean Grand Army Hidden Killer: साल 1812 में नेपोलियन बोनापार्ट की “ग्रैंड आर्मी” का रूस अभियान इतिहास की सबसे खौफनाक सैन्य आपदाओं में से एक था. करीब पांच लाख सैनिकों में से केवल 30 हजार ही ज़िंदा बच सके थे. काफी लंबे समय से यह माना जा रहा था कि इस तबाही की मुख्य वजह कड़ाके की ठंड, भूख और टाइफस बीमारी थी.

लेकिन अब, फ्रांस के पाश्चर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक पैलियोजीनोमिक शोध समूह यानी (प्राचीन डीएनए का अध्ययन करने वाला दल) ने जेनेटिक जांच के आधार पर इस रहस्य के दो और “दोषियों” का चौंकाने वाला खुलासा किया है. 

DNA ने खोले दो और नए राज

विलनियस (लिथुआनिया) में नेपोलियन की सेना के सामूहिक कब्रिस्तान से मिले 13 सैनिकों के अवशेषों पर की गई नई जेनेटिक जांच में दो और नए घातक बैक्टीरिया के अवशेष पाए गए हैं. पहला जिसका नाम साल्मोनेला एंटेरिका एंटेरिका (Salmonella enterica enterica) है. यह पैराटाइफाइड बुखार की वजह से बनता है. और दूसरा बोरेलिया रिकरेंटिस (Borrelia recurrentis) है जो रिलैप्सिंग फीवर (बार-बार लौटने वाला बुखार) की वजह से बनता है. 

निकोलस रास्कोवान ने किया अध्ययन का नेतृत्व

निकोलस रास्कोवान ने अध्ययन का नेतृत्व करते हुए बताया कि इन सभी बीमारियों के लक्षण (जैसे बदन दर्द और थकान) इतने मिलते-जुलते थे कि 1812 में डॉक्टरों के लिए इनमें फर्क कर पाना बेहद ही नामुमकिन था.  इससे पहले साल 2006 में इन्हीं अवशेषों के डीएनए विश्लेषण में दो बैक्टीरिया के भी प्रमाण मिले थे. जिसमें रिकेट्सिया प्रोवाजेकी (Rickettsia prowazekii) बैक्टीरिया और अर्टोनेला क्विंटाना (Bartonella quintana) शामिल है. 

1. रिकेट्सिया प्रोवाजेकी (Rickettsia prowazekii) टाइफस से फैलने वाला बैक्टीरिया

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2. अर्टोनेला क्विंटाना (Bartonella quintana) फीवर की वजह से बनता है ये बैक्टीरिया 

इस नई खोज के बाद, नेपोलियन के सैनिकों के अवशेषों में अब तक चार अलग-अलग घातक बीमारियों के सबूत मिल चुके हैं. तो वहीं,  वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सैनिकों के लिए, इन चार संक्रमणों के साथ-साथ कड़ाके की ठंड, राशन की कमी और युद्ध की थकान का एक साथ सामना करना ही उनकी तबाही की मुख्य वजह बनी. 

युद्ध और बीमारी का था ज्यादा गहरा संबंध

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ एरिका चार्टर्स ने जानकारी देते हुए बताया कि युद्ध और बीमारी का प्रकोप अक्सर साथ-साथ चलता था. युद्ध से प्रशासनिक ढांचा टूटने और खाद्य-जल आपूर्ति बाधित होने से बीमारियों के फैलने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती थी.  नेपोलियन के विशाल साम्राज्य के कारण उस समय व्यापारिक गतिविधियां भी पूरे यूरोप में बीमारी फैलाने का सिर्फ एक माध्यम बी बन पाई थी. 

पैलियोजीनोमिक्स की आधुनिक तकनीकें अब इतिहास की घटनाओं को और गहराई से समझने में बेहद मदद कर रही हैं, जिससे यह पता चलता है कि सैनिकों की तबाही केवल लड़ाई के मैदान तक ही सीमित नहीं थी. 

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