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पूर्व CIA जासूस ने AQ Khan को बताया ‘मौत का सौदागर’, परमाणु तस्करी को लेकर खोले पड़ोसी देश के काले राज; यहां जानें क्या कुछ कहा?

Pakistani nuclear programme: पूर्व CIA ऑफिसर जेम्स लॉलर ने कई विदेशी प्रोग्राम को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सप्लाई करने में खान की भूमिका के लिए उन्हें “मौत का सौदागर” कहा .

Published by Shubahm Srivastava

Pakistani Nuclear Scientist AQ khan: मशहूर पूर्व CIA ऑफिसर जेम्स लॉलर ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी न्यूक्लियर साइंटिस्ट AQ खान ग्लोबल न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन नेटवर्क चलाते समय “कुछ पाकिस्तानी जनरल और नेताओं को अपने पेरोल पर रखते थे.” लॉलर, जिन्हें खान के न्यूक्लियर स्मगलिंग ऑपरेशन को खत्म करने का क्रेडिट दिया जाता है, उन्होंने ANI के साथ एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी.

AQ खान ‘मौत का सौदागर’

CIA के काउंटर-प्रोलिफरेशन डिवीजन को लीड करने वाले लॉलर ने कई विदेशी प्रोग्राम को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सप्लाई करने में खान की भूमिका के लिए उन्हें “मौत का सौदागर” कहा. उन्होंने कहा कि हालांकि यूनाइटेड स्टेट्स लंबे समय से पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम में खान के शामिल होने पर नज़र रख रहा था, लेकिन उनकी बाहरी ट्रैफिकिंग के पैमाने को पहचानने में समय लगा.

इन स्टिंग ऑपरेशन के पीछे का कारण समझाते हुए उन्होंने कहा, “अगर मैं प्रोलिफरेशन और प्रोलिफरेटर को हराना चाहता हूं, तो मुझे प्रोलिफरेटर बनना होगा.”

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इलाके में फैल सकती है न्यूक्लियर महामारी

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी टेक्नोलॉजी से बना ईरानी न्यूक्लियर हथियार इस इलाके में “न्यूक्लियर महामारी” फैला सकता है, जिससे पड़ोसी देश अपने बचाव के तरीके ढूंढेंगे.

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लॉलर ने बताया कि कैसे खान का नेटवर्क प्रोक्योरमेंट से बढ़कर फुल-स्केल न्यूक्लियर ट्रैफिकिंग तक पहुंच गया, जिसमें न केवल सेंट्रीफ्यूज टेक्नोलॉजी बल्कि मिसाइल डिजाइन और एक चीनी एटॉमिक बम का ब्लूप्रिंट भी सप्लाई किया गया.

पाक के के न्यूक्लियर एसेट्स पर थी नजर

CIA के पूर्व ऑफिसर ने एजेंसी के 9/11 के बाद के ऑपरेशन्स पर भी बात की, जिसमें लीबिया भेजे जा रहे शिपमेंट को रोकना और टेररिस्ट ग्रुप्स तक सामान पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तान के न्यूक्लियर एसेट्स पर नज़र रखना शामिल था. CIA डायरेक्टर जॉर्ज टेनेट ने तो उस समय के पाकिस्तानी प्रेसिडेंट परवेज़ मुशर्रफ से खान की एक्टिविटीज़ के सबूत भी मांगे थे.

अपने दशकों के काम पर सोचते हुए, लॉलर, जिन्हें 1980 के दशक में फ्रांस में हुई एक घटना के बाद “मैड डॉग” निकनेम दिया गया था, ने कोई अफ़सोस नहीं जताया और लगातार काउंटर-प्रोलिफरेशन कोशिशों की अहमियत पर ज़ोर दिया. उन्होंने भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच और करीबी सहयोग की भी अपील की, और चेतावनी दी कि साउथ एशिया में न्यूक्लियर टकराव के दुनिया भर में खतरनाक नतीजे होंगे.

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