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Nobel में क्यों अटकी है Trump की जान? जानें क्या है अंदर की बात…पाकिस्तान से इजराइल तक की पूरी कहानी

Nobel Prize पाने की Donald Trump की चाहत बार-बार इंटरनेशनल मीडिया में सुर्खियों में आ रही है। वो दो देशों से अपनी पैरवी करवा चुके हैं।

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Reason Behind Donald Trump ‘Nobel’ Dream: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों अपने लिए एक अलग ही कैंपेन चला रहे हैं। पहले भारत-पाकिस्तान जंग में टांग अड़ा कर उन्होंने पाकिस्तान के मुंह से नोबेल शांति पुरस्कार की सिफारिश निकलवा ली और इसके बाद इजरायल पर एहसान करके फिर से खुद को शांति का देवता घोषित करवा लिया। डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल की चाहत समझना असल में कोई मुश्किल काम नहीं है। वो अपने लिए लॉबी 2 बड़े कारणों से करवा रहे हैं। आगे जानें ट्रंप की मंशा आखिर क्या है और क्यों वो नोबेल प्राइज के पीछे जी-जान से पड़े हैं?

Pakistan को कैसे बरगलाया?

भारत से जंग के बीच में पाकिस्तान को IMF से लोन दिलवाकर ट्रंप ने आग में घी झोंकने की चाल चली, फिर सीजफायर का क्रेडिट खुद ले लिया। इसके बाद आतंकवाद पालने के मुद्दे पर घिरे पाकिस्तान की इमेज पर कपड़ा मारने के लिए ट्रंप ने यहां के लोगों को ‘तेज दिमाग वाला’ और ‘बेहतरीन चीजें’ बनाने वाला बताकर ट्रेड डील फाइनल कर डाली। इसके बाद पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर को लंच पर बुलाया और उनके मुंह से खुद को ‘नोबेल प्राइज देने की सिफारिश’ निकलवाई।

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Israel पर एहसान के पीछे क्या था?

फिर ट्रंप ईरान और इजरायल की जंग में सीधे तौर पर कूद गए और एक के बाद एक कई धमाके करवाकर खामेनेई के देश की न्यूक्लियर हथियार बनाने की सारी प्लानिंग तबाह कर दी। ईरान को घायल करने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी ट्रंप ने इनवाइट किया और उन्होंने भी अमेरिका आकर ट्रंप के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग कर दी है।

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Nobel Prize और America का इतिहास

बता दें कि शांति पुरस्कार दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है, जिसे हासिल करने वाले दुनिया की कुछ विशिष्ट हस्तियों में शामिल हो जाते हैं। इस सम्मान के साथ 10 करोड़ की धनराशि भी आती है। हालांकि, ट्रंप खुद एक बड़े बिजनेसमैन हैं तो उनके लिए धनराशि कोई मायने नहीं रखती है। दरअसल,  2026 में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं। नोबेल प्राइज के लिए लॉबी ट्रंप की जीत की संभावनाओं और उनके पद की ताकत को बढ़ा सकती है।

अभी तक ये सम्मान अमेरिका के सिर्फ 4 राष्ट्रपतियों को ही मिला है। 1906 में थियोडोर रूजवेल्ट, 1920 में वुडरो विल्सन, 2002 में जिमी कार्टर और 2009 में बराक ओबामा। इसमें से वुडरो को नोबेल प्रथम विश्व युद्ध खत्म कराने के लिए किए गए प्रयासों के लिए मिला था और ओबामा को ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता के साथ फलस्तीन मुद्दे पर कूटनीतिक रणनीति के लिए सम्मानित किया गया था। फिजिक्स-केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और शांति क्षेत्र  में दिया जाने वाला नोबेल सम्मान अभी तक 1012 लोगों को मिल चुका है।

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