Categories: विदेश

बांग्लादेश की इकलौती हिंदू पार्टी, जिसके अस्तित्व पर मंडरा रहा ये बड़ा खतरा, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

बता दें कि बांग्लादेश में बसपा का गठन 26 अगस्त 2022 को हुआ था। बांग्लादेशी कट्टरपंथियों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना इस पार्टी को राजनीतिक संगठन के रूप में पंजीकृत मान्यता नहीं दिला पाईं। वहीं, चुनाव आयोग के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकृत होना अनिवार्य है।

Published by Ashish Rai

Bangladesh Sanatan Party: बांग्लादेश में घटती हिंदू आबादी के बीच, वहाँ की राजनीतिक पार्टी भी खतरे में है। बांग्लादेश के एकमात्र हिंदू संगठन, बांग्लादेश सनातन पार्टी (बसपा) को अब वर्ष 2026 में होने वाले बांग्लादेशी चुनावों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बसपा के संस्थापक और महासचिव सुमन कुमार रॉय ने कहा कि बांग्लादेश में चुनाव आयोग स्वतंत्र नहीं है, बल्कि यहाँ की मोहम्मद यूनुस सरकार या सैन्य अधिकारियों के इशारे पर काम करता है।

यूक्रेन में मौत का नाच शुरू, कीव में SBU के कर्नल को मारी गोली, इजराइल की राह पर निकल पड़ा रूस!

पार्टी कार्यालय बनाने की ज़रूरत

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, सुमन कुमार रॉय ने कहा कि बसपा के 120 उप-मंडल और 50 से ज़्यादा समितियाँ हैं और इसके लिए उसे कम से कम कुल 122 पार्टी कार्यालयों की ज़रूरत है, लेकिन इसके लिए काफ़ी पैसा लगेगा और आज भी यहाँ पंजीकृत पार्टियों के पास 122 पार्टी कार्यालय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह अंतरिम सरकार से यह तर्क देने की कोशिश कर रहे हैं कि बसपा को राजनीतिक क्षेत्र में लाना दोनों दलों के लिए क्यों फ़ायदेमंद है।

बसपा (बांग्लादेश सनातन पार्टी) की स्थापना क्यों की गई?

बसपा के गठन पर बात करते हुए रॉय ने कहा, ‘मैं शेख हसीना के खिलाफ नहीं हूँ। उनके पास बहुत अच्छा प्रशासनिक ज्ञान था, लेकिन वे हिंदुओं को सिर्फ़ वोट बैंक समझती थीं। उनकी सबसे बड़ी कमियों में से एक यह थी कि वे सबको खुश रखना चाहती थीं, चाहे वह भारत हो या चीन। वे कट्टरपंथियों और हिंदुओं को एक समान नज़र से देखती थीं, आप ऐसा नहीं कर सकते। इसीलिए हमें 2022 में इस पार्टी की नींव रखनी पड़ी।’

बसपा को नहीं मिली राजनीतिक मान्यता

बता दें कि बांग्लादेश में बसपा का गठन 26 अगस्त 2022 को हुआ था। बांग्लादेशी कट्टरपंथियों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना इस पार्टी को राजनीतिक संगठन के रूप में पंजीकृत मान्यता नहीं दिला पाईं। वहीं, चुनाव आयोग के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकृत होना अनिवार्य है।

2022 की जनगणना के मुताबिक, बांग्लादेश में 1.31 करोड़ से कुछ ज्यादा हिंदू थे, जो देश की आबादी का 7.96% था। रिपोर्टों के अनुसार, 5 अगस्त को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश के 50 से ज़्यादा ज़िलों में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर 200 से ज़्यादा हमले हो चुके हैं। हालाँकि, बांग्लादेश सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हिंदू समुदाय के नेताओं को यकीन दिलाया था कि हम सब एक हैं और सभी को इंसाफ मिलेगा।

Most Women In Country: दुनिया के वो 10 देश जहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक, जाने लिस्ट में कहां मिली है भारत को जगह?

Ashish Rai

Recent Posts

‘खच्चर नहीं, जीप ही मिलेगी’, जब RS में PM मोदी ने इंदिरा गांधी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा सुनाया

PM Modi: राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते…

February 5, 2026

गालीबाज ‘भाभीजान’ पकड़ी गईं, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर किया था वायरल; जानें पूरा मामला

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के अमरोहा की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समरीन निशा, जिन्हें 'भाभीजान'…

February 5, 2026

कौन हैं बिहार के हेमंत मिश्रा? DSP से SDM और अब IAS तक का सफर, जानिए पूरी कहानी

Hemant Mishra IAS Success Story: बिहार के बक्सर जिले के हेमंत मिश्रा ने UPSC परीक्षा…

February 5, 2026

IAS अफसर को कितनी मिलती है सैलरी? जानिए IAS, IPS की सैलरी, पद और सरकारी सुविधाएं

IAS Salary and facilities: युनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा को देश की…

February 5, 2026

WPL 2026 Prize Money: फाइनल जीतते ही टीम का हर खिलाड़ी बन जाएगा करोड़पति, जानें इनामी राशि

WPL 2026 Prize Money: WPL 2026 का फाइनल दिल्ली कैपिटल्स और RCB के बीच वडोदरा…

February 5, 2026