Jewar International Airport: जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 30 अक्टूबर 2025 को होना तय है. लेकिन साल के अंत तक फ्लाइट्स उड़ान भरने की शुरुआत करने लगेंगी. हालांकि दिल्ली-एनसीआर में क्षेत्र के आसपास में निवेश की मांग बढ़ गई है. यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की गाइडलाइंस के मुताबिक सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं. आइए जानते हैं उन सख्त नियमों के बारे में.
जेवर एयरपोर्ट के आसपास निर्माण पर सख्त पाबंदियां
एयरपोर्ट से 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाली हर बिल्डिंग, चाहे वह रिहायशी हो, कमर्शियल, टेलीकॉम टॉवर या फिर पेड़ों की बागवानी, सब पर ऊंचाई की पाबंदी लागू की जाएगी.
15 मीटर से ऊंची बिल्डिंग:
15 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाली किसी भी बिल्डिंग को बनाने से पहले NOCAS पोर्टल के माध्यम से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना अनिवार्य होगा
10 किलोमीटर का दायरा:
एयरपोर्ट से 10 किलोमीटर के दायरे में बिना अनुमति के कोई भी निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे.
फनल एरिया:
एयरपोर्ट के फनल एरिया में नियम और भी सख्त किए जाएंगे, जहां बिल्डिंग की ऊंचाई की अनुमति सिर्फ रनवे से दूरी के 2% तक ही मिल सकेगी
कलर-कोडेड जोनिंग मैप:
AAI ने विभिन्न इलाकों में बिल्डिंग की ऊंचाई तय करने के लिए कलर-कोडेड जोनिंग मैप जारी किया है
निवेश के फायदे और नुकसान:
5 मुख्य फायदे
सुरक्षा में वृद्धि:
ये नियम बर्ड हिट, बिल्डिंग टकराव और रडार इंटरफेरेंस को रोकने में मदद करेंगे, जिससे एयरपोर्ट का संचालन सुरक्षित रहेगा
प्रॉपर्टी वैल्यू में उछाल:
नई बिल्डिंग्स के निर्माण पर पाबंदियों के कारण पुरानी, वैध बिल्डिंगों की कीमत प्रीमियम स्तर पर पहुंच सकती है
क्वालिटी डेवलपमेंट:
NOCAS की वजह से केवल क्वालिटी वाले प्रोजेक्ट्स को ही मंजूरी मिल सकेगी, जिससे अवैध कॉलोनियों का खतरा भी कम रहेगा
राजस्व में वृद्धि:
NOC फीस और क्लियरेंस चार्ज से सरकार की आमदनी बढ़ेगी और बेहतर शहरी प्लानिंग होगी
तेज इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार:
सरकार अधिकृत प्रोजेक्ट्स के लिए सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार देखने को मिलेगा
5 नुकसान:
जमीन मालिकों को नुकसान:
पाबंदियों की वजह से जमीन मालिक अपनी पूरी जमीन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, जिससे हाई-राइज प्रोजेक्ट्स में रुकावट आ सकती है
निवेशकों में भ्रम:
कलर-कोडेड मैप और NOC प्रक्रिया जटिल होने के कारण खरीदारों और निवेशकों में कंफ्यूजन की स्थिति पैदा होगी
डेवलपर्स के खर्चे:
NOC फीस, सर्वे और लंबी अप्रूवल प्रक्रिया से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाएगी
क्षेत्रीय असमानता:
20 किलोमीटर के बाहर वाले इलाकों में असीमित FAR (Floor Area Ratio) की छूट मिलेगी, जिससे अंदर और बाहर के इलाकों में असमानता बढ़ सकेगी
लागू करने में दिक्कतें:
AAI गाइडलाइंस, YEIDA अप्रूवल और तकनीकी सर्वे की जटिलता के कारण नियमों को लागू करने में समय और पैसा का खर्च ज्यादा लगेगा
जेवर एयरपोर्ट निवेश का सुनहरा अवसर है, लेकिन 20 किलोमीटर के दायरे में निवेश करने से पहले, निवेशकों को इन ऊंचाई पाबंदियों और NOC प्रक्रिया को पूरी तरह से समझने की बेहद ज़रूरत है, ताकि भविष्य में किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके.

