CM Yogi Japan visit: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इस समय जापान के दौरे पर हैं. टोक्यो समेत विभिन्न शहरों में आयोजित कार्यक्रमों में उनका भव्य स्वागत किया गया. अपने संबोधनों में सीएम ने उत्तर प्रदेश के विकास, निवेश संभावनाओं, सुशासन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विस्तार से बात कर रहे हैं. उनके भाषणों में स्थानीय लोगों और भारतीय समुदाय की विशेष रुचि देखी जा रही है. गेरुआ वस्त्रों में भारतीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए सीएम योगी प्रशासनिक अनुभवों के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों पर भी जोर दे रहे हैं. यही कारण है कि उनके कार्यक्रमों में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगठनों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है.
टोक्यो में जैन साध्वी ने दिया विशेष उपहार
टोक्यो में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जैन श्वेतांबर परंपरा की साध्वी ने सीएम से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सीएम का जापान आगमन पर आभार व्यक्त किया और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के वैश्विक प्रसार पर चर्चा की. मुलाकात के प्रतीक के तौर पर साध्वी ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की प्रतिमा सीएम योगी को भेंट की.
साध्वी ने भारत आने की जताई इच्छा
साध्वी ने बताया कि वह जापान में रहकर जैन तीर्थंकरों की शिक्षाओं-अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम-का प्रचार-प्रसार कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व का जो संदेश है, वह वैश्विक समाज के लिए प्रासंगिक है. उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत आकर जैन तीर्थस्थलों का दर्शन करना चाहती हैं. साध्वी के अनुसार, वह पहले भी भारत आ चुकी हैं, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के कारण उनकी यात्रा की इच्छा और प्रबल हुई है. उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा जताई थी, जो इस दौरे के दौरान पूरी हो गई.
कार्यक्रम में बच्चे ने सुनाए संस्कृत श्लोक
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सीएम दंडवत प्रणाम किया और संस्कृत श्लोकों का पाठ किया. साध्वी तुलसी ने बताया कि बच्चे का नाम जैन परंपरा के तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के नाम पर रखा गया है. इस दृश्य ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की झलक पेश की.
कौन थे महावीर स्वामी?
जैन धर्म में महावीर स्वामी को 24वें और अंतिम तीर्थंकर के रूप में माना जाता है. उनका जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व वैशाली क्षेत्र (वर्तमान बिहार) में हुआ माना जाता है. बचपन में उनका नाम वर्धमान था. 30 वर्ष की आयु में उन्होंने राजसी जीवन त्यागकर सत्य और आत्मज्ञान की खोज शुरू की. करीब 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई. महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का उपदेश दिया. उनका मानना था कि हर जीव में आत्मा होती है और किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाना पाप है. उन्होंने करुणा, समानता और आत्मसंयम पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी.

