अब IIT या IIM से पढ़ाई जरूरी नहीं! Apple और Nvidia जैसी बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं छोटे कॉलेजों के स्टूडेंट्स

अब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां जैसे Apple, Nvidia और Zoho सिर्फ IIT या IIM से पढ़े हुए लोगों को ही नहीं, बल्कि Tier-3 कॉलेजों यानी छोटे शहरों के “औसत” कॉलेजों से पढ़े लोगों को भी नौकरी दे रही हैं.

Published by Renu chouhan

एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. अब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां जैसे Apple, Nvidia और Zoho सिर्फ IIT या IIM से पढ़े हुए लोगों को ही नहीं, बल्कि Tier-3 कॉलेजों यानी छोटे शहरों के “औसत” कॉलेजों से पढ़े लोगों को भी नौकरी दे रही हैं. इस सर्वे में पाया गया कि इन कंपनियों के लगभग तीन में से एक (34%) कर्मचारी Tier-3 कॉलेज से पढ़े हैं. यानी टैलेंट सिर्फ बड़े नामों में नहीं, बल्कि हर कोने में है.

सर्वे में सामने आई सच्चाई
यह स्टडी प्रोफेशनल नेटवर्किंग ऐप Blind द्वारा की गई, जिसमें 17 से 24 सितंबर 2025 के बीच 1,602 भारतीय टेक कर्मचारियों से बातचीत की गई. इसका मकसद था जानना कि आज के दौर में क्या वाकई किसी कॉलेज का नाम नौकरी में फर्क डालता है या नहीं.

अब डिग्री नहीं, स्किल्स की वैल्यू ज्यादा
पहले IIT, IIM, IISc और BITS Pilani को करियर की सबसे बड़ी लॉन्चिंग पैड माना जाता था. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. जहां Goldman Sachs, Visa और Oracle जैसी कंपनियां अब भी बड़ी यूनिवर्सिटीज़ को प्राथमिकता देती हैं, वहीं Apple, Nvidia और Zoho जैसी नई टेक कंपनियां अब सिर्फ स्किल्स पर ध्यान दे रही हैं.

एक Salesforce कर्मचारी ने बताया, “IIT या NIT के स्टूडेंट्स को इंटरव्यू में थोड़ी बढ़त मिलती है, लेकिन अब बाकी कॉलेजों के छात्रों का भी चांस बढ़ रहा है.” दूसरे कर्मचारी ने कहा- “कंपनियां अब छोटे शहरों और Tier-3 कॉलेजों से भी टैलेंट हायर कर रही हैं. उन्हें भरोसा है कि सही ट्रेनिंग के बाद कोई भी टेक रॉकस्टार बन सकता है.”

कॉलेज का नाम नहीं, काम मायने रखता है
National Institutional Ranking Framework (NIRF) 2025 के अनुसार, कॉलेजों को चार श्रेणियों में बांटा गया-

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* Tier 1: IIT, IIM, IISc, BITS Pilani
* Tier 2: NIT, DTU, Jadavpur University आदि
* Tier 3: सामान्य सरकारी और प्राइवेट कॉलेज
* Tier 4: विदेशी संस्थान

सर्वे में आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि उनके कॉलेज का नाम उनके करियर पर कोई खास असर नहीं डालता. करीब 59% Tier-3 और 45% Tier-4 ग्रेजुएट्स ने कहा कि कॉलेज सिर्फ “रिज्यूमे की एक लाइन” भर है. यहां तक कि 53% विदेशी ग्रेजुएट्स का मानना है कि उनकी डिग्री ने उनकी सैलरी पर कोई फर्क नहीं डाला.

टॉप यूनिवर्सिटी- बड़ी सैलरी
स्टडी में यह भी सामने आया कि टॉप कॉलेज से पढ़ाई करने वाले लोगों को हमेशा ज्यादा सैलरी नहीं मिलती. सिर्फ 15% Tier-3 ग्रेजुएट्स ने कहा कि उनकी डिग्री ने करियर में बड़ा फर्क डाला. वहीं 74% कर्मचारियों ने माना कि कॉलेज का नाम सिर्फ शुरुआती सालों में मायने रखता है, बाद में नहीं.

AI बदल रहा है जॉब मार्केट
यह ट्रेंड ऐसे समय पर आया है जब AI (Artificial Intelligence) दुनिया के जॉब रूल्स बदल रहा है. कई कंपनियां कर्मचारियों को निकाल भी रही हैं और नई AI-आधारित नौकरियां भी दे रही हैं. nthropic के CEO Dario Amodei ने कहा कि आने वाले 5 सालों में आधे एंट्री-लेवल टेक जॉब्स खत्म हो सकते हैं. वहीं Nvidia के CEO Jensen Huang का मानना है कि AI कुछ नौकरियां खत्म करेगा, लेकिन नई भी बनाएगा. इसलिए अब “एडजस्ट होने की क्षमता” ही सबसे बड़ा स्किल बन चुकी है.

छोटे शहरों के लिए नई उम्मीद
इस रिपोर्ट ने छोटे शहरों और आम कॉलेजों से पढ़े लाखों युवाओं में नई उम्मीद जगाई है. अब सिर्फ IIT से सिलिकॉन वैली पहुंचना जरूरी नहीं. कई कंपनियां छोटे शहरों के स्टूडेंट्स पर भरोसा कर रही हैं कि “सही ट्रेनिंग के साथ कोई भी टेक रॉकस्टार बन सकता है.”

Renu chouhan
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