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20 लाख की गाड़ियां 2 लाख में बेची, अब आई और भी बुरी खबर, दिल्ली सरकार ने इस फैसले से लिया यू-टर्न, बताई ये बड़ी वजह

सरकार नहीं चाहती कि उन लोगों को सजा मिले जो अपने पुराने वाहनों की देखभाल करते हैं। CAQM ने दिया था यह आदेश एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (CAQM) की ओर से जारी यह आदेश दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का था।

Published by Ashish Rai

Delhi Old Vehicles Scrap: रेखा गुप्ता दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लोगों को बड़ी राहत दी है। दिल्ली सरकार ने पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगाकर बड़ा बयान दिया है। सरकार ने CAQM को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि तकनीकी चुनौतियों के कारण पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध लगाने का फैसला फिलहाल संभव नहीं है।

इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने पुराने वाहनों को ईंधन न देने का फैसला वापस ले लिया है। यह नियम 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 साल से पुराने डीजल से चलने वाली गाड़ियों के लिए लागू किया गया था।

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खराब रखरखाव वाले गाड़ियों को जब्त करने का काम

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिरसा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी दी कि फिलहाल इस तरह के ईंधन प्रतिबंध को लागू करना मुश्किल है। सरकार प्रदूषण फैलाने वाले और खराब रखरखाव वाले वाहनों को जब्त करने पर काम कर रही है। सरकार नहीं चाहती कि उन लोगों को सजा मिले जो अपने पुराने वाहनों की देखभाल करते हैं। CAQM ने दिया था यह आदेश एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (CAQM) की ओर से जारी यह आदेश दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का था। गौरतलब है कि सर्दियों के महीनों में दिल्ली धुएं की चादर में लिपटी रहती है और पूरे साल हवा की गुणवत्ता खराब रहती है।

सीएक्यूएम के इस आदेश का असर 60 लाख से ज्यादा वाहनों पर पड़ेगा। इनमें कार, दोपहिया, ट्रक और विंटेज ऑटोमोबाइल शामिल हैं।

कैमरा और स्पीकर में दिक्कत की शिकायत

सरकार ने शिकायत की है कि कई जगहों पर लगे एएनपीआर कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इन कैमरों में कई तकनीकी दिक्कतें हैं, जिससे निगरानी में दिक्कत आ रही है। इन कैमरों के जरिए पुराने वाहनों की पहचान की जाएगी।

इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा है कि लाउडस्पीकर भी खराब हैं और आवाज ठीक से नहीं आ रही है, जिससे लोगों तक जरूरी सूचनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।

कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं

सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों से मिलने वाला डेटा एक-दूसरे से कनेक्ट नहीं है, यानी डेटा कोऑर्डिनेशन की कमी है। इसकी वजह से प्रदूषण नियंत्रण और निगरानी का काम ठीक से नहीं हो पा रहा है। दिल्ली सरकार ने इन समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की है।

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Ashish Rai

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