Yuvraj Singh Controversy: जब युवराज सिंह को भारतीय क्रिकेटर का मज़ाक उड़ाना पड़ गया भारी, जाना पड़ा था जेल; यहां जानें आखिर क्या था पूरा मामला?

Yuvraj Singh Controversy: यह विवाद उस वीडियो से शुरू हुआ, जो जून 2020 में इंस्टाग्राम लाइव पर था, जहां युवराज सिंह और उनके पूर्व टीममेट रोहित शर्मा एक लाइव बातचीत कर रहे थे.

Published by Shubahm Srivastava

Yuvraj Singh Casteist Remark Case: भारतीय क्रिकेट के पूर्व स्टार युवराज सिंह को अक्टूबर 2021 में हरियाणा पुलिस ने एक जातिगत टिप्पणी (casteist remark) मामले में आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार किया था और कुछ घंटों के भीतर बांकी जमानत पर रिहा कर दिया गया. यह मामला एक पुराने इंस्टाग्राम लाइव वीडियो से जुड़ा था, जिसमें युवराज सिंह अपने साथी क्रिकेटर के बारे में एक विवादित और आपत्तिजनक कमेंट करते दिखाई दिए थे. पुलिस और अदालत के आदेशानुसार यह गिरफ्तारी एक आधिकारिक प्रकिया के रूप में की गई थी, और बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.

क्या था पूरा विवाद?

यह विवाद उस वीडियो से शुरू हुआ, जो जून 2020 में इंस्टाग्राम लाइव पर था, जहां युवराज सिंह और उनके पूर्व टीममेट रोहित शर्मा एक लाइव बातचीत कर रहे थे. इस बातचीत के दौरान युवराज ने युजवेंद्र चहल के बारे में एक टिप्पणी की, जिसे बाद में कुछ लोगों ने जातिगत संदर्भ वाला और आपत्तिजनक बताया. इस टिप्पणी को देखने वाले कई लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया, और इससे विरोध की आवाज़ें उठीं. 

एक समुदाय की भावनाओं को आहत करने का था आरोप

उस टिप्पणी को लेकर हरियाणा के हिसार जिले में एक एफ़आईआर (First Information Report) दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि युवराज की बातों ने दलित समुदाय की भावनाओं को आहत किया है. शिकायत एक स्थानीय अधिवक्ता ने दर्ज कराई थी, जिसमें पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की कुछ धाराएँ और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान शामिल थे. 

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सार्वजनिक रूप से मांगी थी माफी

युवराज सिंह ने पहले ही सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना जारी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं था और यदि किसी को उनके शब्दों से चोट पहुंची है तो वह उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की असमानता या भेदभाव में विश्वास नहीं करते हैं. 

कोर्ट तक पहुंच गया था मामला

जब मामले की सुनवाई पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में चली, तो कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि यदि पुलिस उनके खिलाफ गिरफ्तार आदेश जारी करती है, तो उन्हें जमानत (interim bail) दी जानी चाहिए जब तक कि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती. इसी आदेश के तहत युवराज को गिरफ्तार करने के बाद कुछ ही घंटों में जमानत प्रदान कर दी गई.

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