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Rituals: जब बारिश न आए तो मेंढक-मेंढकी का विवाह क्यों कराया जाता है, जानें कृषि समाज की अनोखी आस्था

Rituals: कुछ जगहों पर लोग बारिश कराने के लिए पूजा-पाठ करते हैं , तो कुछ जगहों पर मेंढक और मेंढकी की शादी कराई जाती है. जानें हिंदू धर्म से जुड़ी प्रथा और परंपरा क्या हैं?

Published by Tavishi Kalra

Know Your Rituals:  हिंदू धर्म के अनुसार बहुत ही मान्यताएं और प्रथाएं है जिनका  पालन किया जाता है लोग इन प्रथाओं को असरदार भी मानते हैं और उन्होंने यह समझा भी है इसका असर दिखाई देता है. अगर बारिश में देरी होने के कारण मेंढक-मेंढकी की शादी कराई जाती है. यह परंपरा बहुत पुरानी है. माना जाता है इस परंपरा को करने से बारिश जल्दी हो जाती है,

इस परंपरा से माना जाता है कि  इंद्रदेव शीर्घ्र प्रसन्न होकर वर्षा करते हैं. इसीलिए अगर मानसून में देरी होती है और लोग गरमी से परेशान होने लगते हैं तो इंद्रेदव को प्रसन्न करने के लिए मेंढक-मेंढकी की शादी करते हैं. यह हिंदू धर्म में देवताओं को प्रसन्न करने का एक तीरका का, खासकर जब बारिश नहीं होती है या कम होती है.

मेंढक की टर-टर की आवाज सदियों से वर्षा का प्रतीक मानी जाती है. इसकी आवाज से ना केवल वर्षा होती है बल्कि मौसम भी खुशनुमा हो जाता है. इस परंपरा को केवल गर्मी से बेहाल लोग ही नहीं करते हैं बल्कि कृषि प्रधान समाज (agrarian societies) जो अपनी फसल के लिए भी बारिश का इंतजार करते हैं मेंढकों की शादी (frog weddings) जैसी परंपराओं को सूखा टालने का एक तरीका मानते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह बारिश के हिंदू देवता वरुण (Lord Varun) को प्रसन्न करता है.

यह एक प्रतीकात्मक कार्य है जिसमें मेंढक-मेंढकी की शादी कराकर, उन्हें सजाकर, मंत्र पढ़कर और पूजा करके यह उम्मीद की जाती है कि इससे इंद्र देव प्रसन्न होंगे और पानी बरसाएंगे. इसमें मेंढक और मेंढकी को माला पहनाई जाती है, उन्हें सिंदूर लगाया जाता है और वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है.

क्या कहता है साइंस?

बता दें कि साइंस इन सभी बातों को नकारता है. एक्सपर्ट के मुताबिक बारिश को लेकर जो चक्र बने हुए हैं, बारिश उसी तरीके से होती है. उदाहरण के लिए भाप का ऊपर जाना बादल बनना और बारिश होना. साइंस कहता है कि पूजा या किसी तरह से मेढ़क मेढ़की की शादी कराने से बारिश नहीं होती है. 

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Tavishi Kalra
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