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Premanand Ji Maharaj: घर के मंदिर में पूजा करना और मंदिर में जाकर पूजा करने में क्या अंतर है?, जानें प्रेमानंद जी महाराज से

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल वचन लोगों को उनके जीवन के प्रेरित करते हैं. नाम जप, भगवान की सेवा, माता-पिता की सेवा करना ही परम सेवा है. जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज से घर के मंदिर में पूजा करना, मंदिर में जाकर पूजा करने में क्या अंतर है?

By: Tavishi Kalra | Published: January 6, 2026 8:02:43 AM IST



Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.

भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि घर के मंदिर में पूजा करना और मंदिर में जाकर पूजा करने में क्या अंतर है?

प्रेमानंद दी मगहाराज बताते हैं कि दोनों ही पूजा में बहुत अंतर है. पूजा घर के मंदिर में जाकर करें तो इसका अलग फल मिलता है और फिर तीर्थ स्थान में जाकर या फिर धाम में जाकर करने से विशेष फल मिलता है. 1 माला आपकी एक हजार माला के बराबर हो गई. आप वृंदावन धाम में जपें तो एक माला एक लाख के बराबर होती है. घर का भजन और तीर्थों का भजन अलग होता है. तीर्थ के दर्शन करने से हमारा मन पवित्र होता है. यह जरूर है कि जो घर में हम उपासना करते हैं उससे कई गुना लाख गुना फल हमें मंदिर या तीर्थ या धाम में प्राप्त होता है.

अपने घर में बैठकर भजन कर रहें है और गंगा के तट पर बैठकर भजन कर रहे हैं, तो अंतर है , गंगा की धारा बह करही है और माला का जप कर रहें हैं, यह अपने आप में पवित्र है. गंगा जल के अंतर खड़े होकर भजन कर रहे हैं या नाम जप कर रहे हैं, तो इससे भी अधिक फल प्राप्त होता है. यह भजन की पद्धतियां हैं, घर से कहीं लाख गुना फायदा होता है. हम सभी को कोशिश करनी चाहिए की थोड़ा समय निकाल कर इन पवित्र जगाहों पर भजन करें.

धाम आएं हैं तो मनोरंजन मन करें, उपवास करें, गंदा आचरण ना करें, वृंदावन की परिक्रमा करें, फल लेकर बंदर को खिलाएं, दान करें, मंगलमय कार्य करें, जिससे हमारे दुख कटें और सुख की प्राप्ति हो.  पाप आचरण ना करें, मनमानी ना करें, यहां का पुण्य और पाप दोनों की लाख गुना है तो अच्छे कर्म करें और लाभ पाएं. धाम का किया हुआ पाप आपको भारी दंड देगा.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता 

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