Panchak 2026: हिंदू धर्म में पंचक को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. पंचक के दौरान शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. पंचक नक्षत्रों के मेल से बनने वाला विशेष योग है. पंचक 5 दिन के लिए होते हैं. जब चन्द्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है, तब उस समय को पंचक कहते हैं.
ज्योतिष शास्त्र में पंचक को शुभ नक्षत्र नहीं माना जाता है. इसीलिए इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. ज्योतिष के अनुसार पांच नक्षत्रों के संयोग को पंचक कहा जाता है. इन पांच नक्षत्रों में घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र हैं.
पंचक का स्वामी ग्रह कुंभ और मीन राशि है. हर महीने जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में आता है तो पंचक लगता है.
जनवरी 2026 में पंचक कब से शुरू?
- जनवरी में पंचक की शुरुआत 21 जनवरी, 2026, बुधवार को रात 1 बजकर 35 मिनट पर होगी.
- वहीं पंचक का अंत 25 जनवरी, 2026, रविवार को दोपहर को 1 बजकर 35 मिनट पर होगा.
बुधवार से शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहते हैं, जो शुभ माना जाता है और इस दौरान सरकारी कार्यों, संपत्ति संबंधी कामों और लेन-देन में सफलता मिलने की संभावना होती है, हालांकि, कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, निर्माण कार्य और आग से जुड़ी वस्तुओं को इकट्ठा करने से बचना चाहिए.
पंचक का नाम सुनते ही लोगों को डर लगता है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्य ना करें, क्योंकि इस दौरान किए गए शुभ कार्य अशुभ फल दे सकते हैं, इस समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है. जानें इस दौरान क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए.
पंचक के दौरान ना करें यह काम
- चारपाई बनवाना
- लकड़ी, घास आदि इकट्ठा करना, माना जाता है ऐसा करने से आग का खतरा बढ़ जाता है.
- दक्षिण दिशा की यात्रा , पंचक में इस ओर यात्रा ना करें, माना जाता है कि यह दिशा यम की दिशा है.
- शव का अंतिम संस्कार (पुतले बनाकर करें)
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