Categories: धर्म

Mahagauri : जानिए नवरात्रि में मां के आठवें रूप का क्यों है सर्वाधिक महत्व और भगवान शंकर से इनका किस तरह है कनेक्शन

Navratri Ashtami 2025: जानिए नवरात्रि के आठवें दिन मां महा गौरी की पूजा का महत्व, भगवान शिव से जुड़ा पौराणिक कनेक्शन, महा गौरी के स्वरूप और पूजा विधि.

देवी भागवत पुराण में देवी मां के नौ रूप और दस महाविद्याओं को आदिशक्ति बताया गया है किंतु भगवान शंकर की अर्धांगिनी के रूप में महागौरी सदैव विराजमान रहती हैं. महागौरी के रूप में  देवी मां का यह आठवां स्वरूप है जिन्हें सौंदर्य की देवी भी कहा जाता है. नवरात्रि के अवसर पर आठवें दिन मां के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है जो करुणामयी, स्नेहमयी, शांत और कोमल दिखती हैं. मान्यता है कि इनकी शक्ति अचूक है और मां अपने भक्तों को सदैव फल प्रदान करती हैं. महादेव की अर्धांगिनी के रूप महागौरी की पूजा करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और वह ऐसे पुण्य का अधिकारी हो जाता है जो कभी नष्ट नहीं होता है.

भगवान शंकर ने दिया मां को ऐसा स्वरूप

पौराणिक कथाओं के अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने महर्षि नारद के कहने पर भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की. घनघोर जंगल में उन्हें तप करते हुए हजारों बरस गुजर गए. शुरू में जंगली फल, बिल्व पत्र और बाद में मां ने हजारों वर्ष बिना जल पिए तप किया. इस कारण उनका शरीर काला पड़ गया. जब मां की कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए तो उन्होंने मां को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन देते हुए पवित्र गंगा नदी में स्नान करने को कहा. स्नान करते ही मां का शरीर गोरा होने के साथ ही कांतिमय और ओजपूर्ण बन गया. गोरा रंग होने के कारण मां पार्वती को महागौरी के नाम से जाना जाने लगा. 

इन दो नामों से भी मां को पुकारा जाता 

Related Post

महागौरी का जैसा गौर वर्ण है उसी के अनुरूप उनके वस्त्र और आभूषण आदि सभी सफेद हैं. उनका प्रिय रंग भी सफेद है. यही कारण है कि पूजन में मां को सफेद चीजें और भोग अर्पित किए जाते हैं. सफेद रंग प्रिय होने और श्वेत वस्त्र धारण करने के कारण इन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है, शिव जी के कारण इनका एक नाम शिवा भी है. इस स्वरूप में मां का वाहन वृषभ है और इनकी चार भुजाएं हैं. दाहिने हाथ में ऊपर वाला अभय मुद्रा में तो नीचे वाले में त्रिशूल विराजमान है. बाईं तरफ ऊपर के हाथ में मां ने डमरू धारण कर रखा है तो नीचे वाला हाथ वरद मुद्रा में है. शांत स्वरूपा मां गौरी अपने भक्तों को समस्याओं से मुक्ति दिलाने के साथ ही कल्याण करती हैं.

सुख-शांति व धन-वैभव की अधिष्ठात्री

मां महागौरी सुख-शांति व धन-वैभव की अधिष्ठात्री हैं. अष्टमी के दिन इनकी आराधना के साथ ही कन्या पूजन का भी विधान है. महागौरी का अर्थ है गोरे रंग का वह रूप जो सौन्दर्य से भरपूर और प्रकाशमान है. उनका ध्यान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

Pandit Shashishekhar Tripathi

Recent Posts

India vs England: 2 साल बाद सूर्या की तरह अक्षर ने कैसे लिखी जीत की कहानी, देखें वीडियो

India vs England: टी20 विश्व कप 2026 सेमीफाइनल में अक्षर पटेल ने शानदार फील्डिंग, तीन…

March 6, 2026

Mojtaba Khamenei: औलाद पैदा नहीं कर सकते थे मोजतबा खामेनेई! कर रखीं थीं कई शादियां, नए सुप्रीम लीडर को लेकर खुले बड़े राज़

Iran-Israel War: US डिप्लोमैट द्वारा लीक की गई जानकारी में कहा गया कि, मोजतबा खामेनेई…

March 6, 2026

India-US Relations: जंग के बीच भारत को बड़ी राहत! अमेरिका ने दे दी छूट; अब इस देश से आएगा तेल

Russian Oil: इजराइल ईरान के बीच चल रही वॉर के कारण लगातार अन्य देशों को…

March 6, 2026

Fighter Jet Crash: पहले रडार से गायब, फिर मिला मलबा! भारतीय वायुसेना का सुखोई फाइटर जेट क्रैश

Fighter Jet Crash: इंडियन एयर फ़ोर्स की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान के…

March 6, 2026

Aaj Ka Mausam: पसीने छुड़ाएगी गर्मी या बारिश देगी राहत? जानें कैसा रहेगा दिल्ली से लेकर बिहार तक का मौसम

Today Weather: दिल्ली से लेकर यूपी तक का मौसम अब अपना मिजाज बदलने लगा है.…

March 6, 2026