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पितरों का श्राद्ध करने के लिए नहीं है जेब में पैसा तो न हो परेशान, इस उपाय को करने से वे होंगे तृप्त, मिलेगा आशीर्वाद

Shradh 2025: पितरों के श्राद्ध कर्म को बहुत ही धूमधाम के साथ उत्सव के रूप में मनाते हैं किंतु महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने पूर्वजों के श्राद्ध कर्म पूरे मन से किया जाना चाहिए। आइए बतातें हैं इसका असली महत्व

Published by Preeti Rajput

Pitru Paksha 2025: भारतीय दर्शन में जिस तरह अन्य तीज त्योहारों का महत्व है उसी तरह से एक पूरा पखवारा पितरों के लिए आरक्षित है। यूं तो पूर्वजों को हमेशा ही याद रखना चाहिए क्योंकि हमारा अस्तित्व ही उनसे है। फिर भी भारतीय ऋषियों ने एक पखवारा उनके लिए आरक्षित कर दिया है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक का पखवारा पूर्वजों को याद करने के लिए ही है। इस दौरान उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से वे अदृश्य होकर हमारे जीवन में सहायक बने रहते हैं।

कोप से बचना है तो प्रायश्चित करें

देखा जाता है कि बहुत से लोग पितृपक्ष में पितरों के श्राद्ध कर्म को बहुत ही धूमधाम के साथ उत्सव के रूप में मनाते हैं किंतु महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने पूर्वजों के श्राद्ध कर्म में कितना पैसा खर्च किया और कितने लोगों को श्राद्ध भोज पर आमंत्रित किया। वास्तव में महत्व तो इस बात का है कि हम अपने पिता, पितामह, गुरुजनों आदि को जीवित अवस्था में कितना सम्मान देते हैं, सेवा और उनकी आज्ञा का पालन करते हैं।  वास्तविकता तो यही है कि जो लोग अपने माता-पिता की जीवित अवस्था में सेवा करना तो दूर बल्कि उनका अपमान करते हैं तो ऐसे लोगों का श्राद्ध करना निरर्थक माना जाता है।  उनका श्राद्ध कर्म तभी फलीभूत होगा जब उनके अंदर प्रायश्चित का भाव हो, ऐसा करने पर ही वह पितरों के कोप से बच सकेंगे। 

जीवित बुजुर्गों का सम्मान करना न भूलें

वास्तव में पितरों को आपसे धन या अन्य किसी तरह की कोई चाहत नहीं है। उनकी तो केवल एक ही कामना होती है कि आने वाली पीढ़ियां उनकी अधूरी इच्छाओं को पूरा करें। यदि आपको लगता है कि आपके पितरों की कोई इच्छा थी जो वो अपने जीवन में पूरी नहीं कर सके और आपको उसकी जानकारी है तो उसे अवश्य ही पूरा करना चाहिए।  इस कार्य के लिए पितृपक्ष से अच्छा समय कोई समय हो ही नहीं सकता है। 

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इस तरह करें पितरों को याद

श्राद्ध मीमांसा ग्रंथ में लिखा है कि यदि किसी व्यक्ति के पास पितरों का श्राद्ध करने के लिए कुछ भी न हो तो वह दक्षिण दिशा की तरफ मुख कर अपने दोनों हाथों से आकाश की ओर कुशा उठाकर अपने पूर्वजों का ध्यान कर पश्चाताप करते हुए जोर-जोर से अन्तर्भाव से कहे, हे मेरे पितरों ! मेरे पास कोई धन नहीं है, मैं आपको इन आंसुओं के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं दे सकता हूं। ऐसा करने से भी पितर संतुष्ट होते हैं और उस व्यक्ति को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। 

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Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

Preeti Rajput
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Tags: shradh 2025

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