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Holika Dahan 2026: आज 3 मार्च के दिन कब होगा होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Holika Dahan 2026: होली के त्योहार की तैयारीयां जोरो पर हैं, कल बहुत सी जगह पर होलिका दहन हुआ और काफी जगहों पर आज भी होगा. तो आइए जानते हैं समय, महत्व और पूजा विधि-

Published by sanskritij jaipuria

Holika Dahan 2026: फाल्गुन महीने की पूर्णिमा की रात आते ही चारों ओर उत्सव का माहौल बन जाता है. इसी रात मनाया जाता है होलिका दहन, जो रंगों के त्योहार होली की शुरुआत का प्रतीक है. ये पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है और लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. बहुत सी जगहों पर कल होलीका मनाई गई थी और बहुत सी जगह आज होगा,तो आइए जानते हैं समय

होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी है. मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे. उनके पिता हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानते थे, लेकिन प्रह्लाद ने उनकी बात नहीं मानी. क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद से प्रह्लाद को अग्नि में बैठा दिया. होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था, परंतु अहंकार और अधर्म के कारण वो स्वयं जल गई और प्रह्लाद सेफ रहे. इस घटना की याद में हर साल होलिका दहन किया जाता है.

होलिका दहन की तैयारी

इस दिन किसी खुले स्थान पर लकड़ी, उपले और सूखी टहनियों से एक चिता तैयार की जाती है. स्थान को गंगाजल से पवित्र किया जाता है. कई जगहों पर गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतीकात्मक आकृतियां भी बनाई जाती हैं. पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल, नारियल, गेहूं या जौ के दाने, तिल, गुड़ और कपूर रखे जाते हैं.

पूजा की विधि

होलिका दहन की पूजा शुभ मुहूर्त में की जाती है और भद्रा काल से बचना जरूरी माना जाता है. पूजा करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके संकल्प लिया जाता है. गंगाजल छिड़ककर वातावरण को शुद्ध किया जाता है. इसके बाद होलिका की पूजा कर रोली और अक्षत अर्पित किए जाते हैं.

लकड़ी के ढेर के चारों ओर मौली को तीन या पांच बार लपेटा जाता है. फिर घी और कपूर से अग्नि प्रज्वलित की जाती है. अग्नि जलने के बाद लोग सात बार उसकी परिक्रमा करते हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं. जौ या गेहूं के दाने भूनकर प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं. अग्नि शांत होने के बाद उसकी राख को तिलक के रूप में माथे पर लगाया जाता है, जिसे शुभ माना जाता है.

जानिए आज आपके शहर में होलिका दहन का समय

आज देश के अलग-अलग शहरों में होलिका दहन का शुभ समय शाम के बाद निर्धारित किया गया है. नीचे मेन शहरों के अनुसार पूजा और दहन का समय दिया जा रहा है, ताकि आप सही मुहूर्त में विधि-विधान से ये पर्व मना सकें.

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 दिल्ली: शाम 6:48 बजे से रात 8:50 बजे तक
 नोएडा: शाम 6:50 बजे से रात 8:50 बजे तक
 लखनऊ: शाम 6:52 बजे से रात 8:48 बजे तक
 मुंबई: शाम 6:48 बजे से रात 8:50 बजे तक
 चंडीगढ़: शाम 6:50 बजे से रात 8:48 बजे तक
 शिमला: शाम 6:49 बजे से रात 8:49 बजे तक
 जयपुर: शाम 6:47 बजे से रात 8:50 बजे तक
 पटना: शाम 6:54 बजे से रात 8:15 बजे तक
 बेंगलुरु: शाम 6:47 बजे से रात 8:50 बजे तक
 चेन्नई: शाम 6:49 बजे से रात 8:47 बजे तक
 मथुरा: शाम 6:49 बजे से रात 8:50 बजे तक
 भोपाल: शाम 6:48 बजे से रात 8:50 बजे तक
 हैदराबाद: शाम 6:50 बजे से रात 8:48 बजे तक
 वाराणसी: शाम 6:48 बजे से रात 8:50 बजे तक
 रायपुर: शाम 6:47 बजे से रात 8:47 बजे तक

अपने शहर के निर्धारित समय के अनुसार होलिका दहन करें और पूजा के दौरान शांति और श्रद्धा बनाए रखें. शुभ मुहूर्त में किया गया दहन परिवार के लिए सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.

क्या करें

इस दिन सादा और सात्विक भोजन करना अच्छा माना जाता है. फल, मिठाई या अनाज से बने पकवान खाए जा सकते हैं. भगवान विष्णु की आराधना और दान-पुण्य करने से भी पुण्य फल प्राप्त होता है. पूजा के समय पीले, लाल या गुलाबी जैसे उजले और प्रसन्न रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.

क्या न करें

होलिका दहन के दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए. काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचना उचित माना जाता है. पूजा के समय बाल खुले न रखें. अग्नि में प्लास्टिक या कोई हानिकारक वस्तु नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इससे वातावरण प्रदूषित होता है.

इस दिन अनावश्यक विवाद, कटु वचन या क्रोध से बचना चाहिए. बाल और नाखून काटना भी वर्जित माना गया है. अजनबियों से खाने-पीने की वस्तु लेने से बचना चाहिए. आधी रात के बाद होलिका की अग्नि के पास घूमना या जलती लकड़ी घर लाना भी ठीक नहीं माना जाता.

क्या है महत्व?

होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक सोच का प्रतीक है. ये हमें सिखाता है कि सच्चाई और भक्ति की राह पर चलने वाला व्यक्ति हर कठिनाई से पार पा सकता है. अग्नि में पुरानी नकारात्मक बातों को त्यागकर हम नए उत्साह और विश्वास के साथ जीवन की शुरुआत कर सकते हैं.

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