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Holashtak 2026: कब से शुरू होगा होलाष्टक, क्यों माना जाता है अशुभ और कितने दिन रहता है इसका प्रभाव?

Holashtak 2026 Date | Holashtak kab se shuru hoga: होलाष्टक होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाली धार्मिक अवधि है, जिसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होती है और समापन होलिका दहन पर माना जाता है. इन आठ दिनों को परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं.

Published by Ranjana Sharma

Holashtak 2026: होली से पहले आने वाले ‘होलाष्टक’ धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत होती है और यह होलिका दहन तक चलता है. यानी होली से ठीक आठ दिन पहले शुरू होकर आठ दिनों तक इसका प्रभाव रहता है.

कब से शुरू होगा होलाष्टक

वर्ष 2026 में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक प्रारंभ होगा और होलिका दहन तक जारी रहेगा. पंचांग के अनुसार यह अवधि आठ दिनों की होती है. अंतिम दिन होलिका दहन के साथ इसका समापन माना जाता है.

क्या है होलाष्टक

‘होलाष्टक’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है-‘होली’ और ‘अष्टक’. अष्टक का अर्थ होता है ‘आठ दिन’. यानी होली से पहले के वे आठ दिन, जिनमें कुछ शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है, होलाष्टक कहलाते हैं.

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क्यों माना जाता है अशुभ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलाष्टक के दौरान वातावरण में उग्रता और ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण शुभ कार्यों के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता. मान्यता है कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद को इन्हीं दिनों में अनेक यातनाएं दी गई थीं. अंत में फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन हुआ और प्रह्लाद की भक्ति की विजय हुई. इसी कारण इन आठ दिनों को संघर्ष और परीक्षा का समय भी माना जाता है.

कितने समय तक रहता है प्रभाव?

होलाष्टक का प्रभाव अष्टमी तिथि से शुरू होकर फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) तक रहता है. जैसे ही होलिका दहन संपन्न होता है, अगले दिन रंगों की होली के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से की जा सकती है.

क्या करें और क्या न करें?

इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप और दान को शुभ माना गया है, जबकि नए कार्यों की शुरुआत और बड़े मांगलिक कार्यक्रमों को टालने की सलाह दी जाती है. धार्मिक आस्था के अनुसार होलाष्टक आत्मचिंतन और भक्ति का समय है. हालांकि, यह मान्यताएं परंपरा और विश्वास पर आधारित हैं. ज्योतिष और धर्म के अनुसार इसका पालन किया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से इसे अशुभ साबित करने का कोई प्रमाण नहीं है.

Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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