भारत में आपने अक्सर दुकानों, घरों और गाड़ियों पर नींबू-मिर्च टंगा हुआ देखा होगा। यह दृश्य हमारे लिए आम है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर लोग ऐसा क्यों करते हैं? ज्यादातर लोग इसे अंधविश्वास मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे गहरी मान्यताएँ और वैज्ञानिक वजहें भी जुड़ी हुई हैं। नींबू और मिर्च को बुरी नजर से बचाव का प्रतीक माना जाता है और लोग इसे अपने व्यापार और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए लगाते हैं।
पुराने जमाने के लोगों की बातें
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, नींबू और मिर्च में शक्तिशाली ऊर्जा होती है जो नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है। माना जाता है कि जब कोई बुरी नजर या नकारात्मक ऊर्जा हमारे घर या व्यवसाय को प्रभावित करती है, तो नींबू और मिर्च उसे सोख लेते हैं। इसीलिए दुकानदार अक्सर अपनी दुकान के दरवाजे पर इसे टांगते हैं ताकि उनके व्यापार में तरक्की हो और कोई भी नकारात्मकता पास न आए।
नींबू मिर्ची को लेकर क्या है साइंटिस्ट का कहना
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो नींबू में एसिडिक तत्व होते हैं और मिर्च में तीखापन। जब हवा इनके संपर्क में आती है तो इसमें मौजूद गंध और रसायन वातावरण को कीटाणुओं और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं। इसीलिए पुराने समय में जब सफाई की सुविधाएं कम थीं, तब इसे प्राकृतिक सुरक्षा उपाय की तरह इस्तेमाल किया जाता था।
नींबू-मिर्च शुभ क्यों माना जाता हैं
गाड़ियों में इसे लटकाने का कारण भी लगभग यही है। लोग मानते हैं कि यात्रा सुरक्षित हो और कोई अनहोनी न घटे, इसलिए नींबू-मिर्च लगाना शुभ होता है। साथ ही इसका एक व्यावहारिक पहलू भी है, क्योंकि सफर के दौरान गाड़ी के आसपास की हवा में यह प्राकृतिक कीटाणुनाशक की तरह काम करता है।इसके अलावा, यह परंपरा लोगों के मन को भी मानसिक सुरक्षा देती है। जब दरवाजे या गाड़ियों पर नींबू-मिर्च टंगी होती है, तो लोग विश्वास के साथ अपने काम और सफर में आगे बढ़ते हैं। यह एक तरह से सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह एक सांस्कृतिक सीख और सुरक्षा का संकेत बनता है। कुल मिलाकर, नींबू-मिर्च टांगना सिर्फ अंधविश्वास नहीं बल्कि यह आस्था, सकारात्मकता, स्वास्थ्य का मिश्रण है। यही वजह है कि आज भी भारत के कई हिस्सों में लोग इसे अपनाते हैं और इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानते हैं।

