Grahan 2025 : इस महीने में पड़ेंगे दो ग्रहण लेकिन एक में ही रहना होगा फुल अलर्ट, जानिए दूसरे ग्रहण में क्यों नहीं करनी है चिंता

Grahan 2025 :  सितंबर के महीने में एक नहीं दो ग्रहण पड़ रहे हैं, ऐसे में इन दोनों ही ग्रहणों की स्थिति के बारे में जानना आवश्यक है।  तो चलिए जानते है क्या कहते है पंडित शशिशेखर त्रिपाठी( Pandit Shashishekhar Tripathi), कैसे होता है ग्रहण?, खग्रास और खंडग्रास में अंतर? और बाकी जरूरी बाते

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Grahan 2025 :  सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर समाने लगता है। ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान ब्रह्मांड की इन घटनाओं का बहुत ही ध्यान से अध्ययन करता है। सितंबर के महीने में एक नहीं दो ग्रहण पड़ रहे हैं, ऐसे में इन दोनों ही ग्रहणों की स्थिति के बारे में जानना आवश्यक है।  तो चलिए जानते है क्या कहते है पंडित शशिशेखर त्रिपाठी( Pandit Shashishekhar Tripathi), कैसे होता है ग्रहण?, खग्रास और खंडग्रास में अंतर? और बाकी जरूरी बाते

कैसे होता है ग्रहण

ब्रह्मांड में जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे आ जाता है तो चंद्रग्रहण की स्थिति बनती है। चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को ही होता है और जब सूर्य पृथ्वी तथा चंद्रमा क्रम से एक सीधी रेखा में आ जाते हैं तो चंद्रगहण होता है। सितंबर माह में पहले खग्रास चंद्रग्रहण और फिर महीने के अंतिम सप्ताह में खंडग्रास सूर्यग्रहण होगा। इसी तरह सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आकर सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने से रोक देता है। इस महीने में जहां एक ओर 7 सितंबर पूर्णमासी को चंद्रग्रहण पड़ रहा है वहीं इसी महीने में 21 तारीख को खंडग्रास सूर्यग्रहण होगा।

खग्रास और खंडग्रास में अंतर

खग्रास और खंडग्रास का अंतर इन शब्दों में ही छिपा है खग्रास का अर्थ है पूरी तरह से ढकना जबकि खंडग्रास का अर्थ आंशिक रूप से ढकना होता है। खग्रास चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह से ढक जाएगा जबकि खंडग्रास सूर्य ग्रहण में सूर्य आंशिक रूप से ढक सकेगा। 

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कब है खग्रास चंद्रग्रहण

खग्रास चंद्रग्रहण सात सितंबर रविवार की रात में पड़ेगा। ग्रहण का छाया प्रवेश रात 8 बजकर 58 मिनट पर होगा। स्पर्श रात्रि 9 बजकर 57 मिनट, मध्य रात में ठीक 11 बजकर 42 मिनट पर होगा और मोक्ष रात में एक बजकर 27 मिनट होगा। इसका सूतक दिन में 12 बजकर 57 मिनट पर लग जाएगा। भारत सहित कुछ अन्य देशों में दिखने के कारण इस ग्रहण का महत्व बहुत अधिक है और जिन स्थानों पर यह दिखेगा वहां के लोगों को सूतक और स्नान दान, जप आदि कर्म करने होंगे। 

इस दिन होगा खंडग्रास सूर्यग्रहण

सितंबर महीने की 21 तारीख अर्थात रविवार आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या को खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। भारतीय समयानुसार इसका स्पर्श रात्रि 11 बजे, मध्य रात 01 बजकर 12 मिनट और मोक्ष रात 03 बजकर 24 मिनट पर होगा। किंतु यह भारत में नहीं दिखेगा इसलिए ग्रहण के नियमों का पालन भी यहां के लोगों को नहीं करना होगा।

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