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Varahi Devi: वाराही देवी की पूजा से कैसे बदल सकता है आपका भाग्य

वाराही देवी की कथा अद्भुत है, जिसमें उनके चमत्कारिक शक्तियों का वर्णन मिलता है.श्रद्धालु मानते हैं कि आस्था और विश्वास के साथ उनकी पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है और कठिनाइयाँ दूर होती हैं.

Published by Komal Singh

देवी-देवताओं की कथाओं में अनेक रहस्य और गहराई छिपी है. इन्हीं में से एक हैं मां वाराही देवी, जो शक्ति के पंचमुखी स्वरूपों में से एक हैं. इन्हें देवी भुवनेश्वरी का अवतार माना जाता है और इनका स्वरूप वराहयानी सूअर के मुख के रूप में है. यह स्वरूप देवी के क्रोध और रक्षण शक्ति दोनों का प्रतीक है. वाराही देवी की पूजा तंत्र साधना, शक्ति उपासना और भक्ति मार्गतीनों में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से मां वाराही की आराधना करता है, उसे भय, रोग, दरिद्रता और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है.वाराही देवी की कथा केवल एक धार्मिक कहानी नहीं है, बल्कि यह सिखाती है कि जीवन में जब भी नकारात्मकता या अंधकार बढ़े, तब भीतर की शक्ति को जागृत करके अन्याय का अंत करना चाहिए. देवी का रूप हमें यह याद दिलाता है कि करुणा और क्रोध  दोनों का संतुलन ही सच्चा जीवन मार्ग है. आइए जानते हैं मां वाराही देवी की पौराणिक कथा और उनके पूजन से जुड़े विशेष अर्थ, जो मानव जीवन के हर पहलू से जुड़ते हैं.

 

देवी वाराही का उद्गम और स्वरूप

 

वाराही देवी को देवी लक्ष्मी का रौद्र रूप माना गया है, जो भगवान विष्णु के वराह अवतार से उत्पन्न हुईं. उनका स्वरूप वराह के मुख और मानव शरीर के रूप में वर्णित है. यह रूप पृथ्वी और न्याय की रक्षा का प्रतीक है. माना जाता है कि जब अधर्म बढ़ता है, तब देवी वाराही रक्षक बनकर अपने भक्तों को हर संकट से बचाती हैं. यह स्वरूप हमें सिखाता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव न्याय और धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए.

 

पौराणिक कथा जब देवी ने असुरों का संहार किया

 

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय पृथ्वी पर असुरों का आतंक फैल गया था. उनके अत्याचार से देवता और मनुष्य दोनों पीड़ित हो उठे. तब भगवान विष्णु के वराह रूप से वाराही देवी का जन्म हुआ. उन्होंने अपनी अपार शक्ति से उन असुरों का नाश किया जो संसार को अधर्म की ओर ले जा रहे थे. यह कथा दर्शाती है कि जब भी अन्याय बढ़ता है, तब स्त्री-शक्ति ही संतुलन लाती है और संसार को पुनः धर्ममार्ग पर स्थापित करती है.

 

देवी वाराही का स्थान और पूजा परंपरा

 

वाराही देवी की पूजा विशेष रूप से तंत्र साधना और शक्ति साधना में की जाती है. दक्षिण भारत के कांचीपुरम और तिरुपति के आसपास इनके प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं. देवी की मूर्ति को प्रायः वराह मुख और त्रिशूल, खड्ग, तथा मुद्रा धारण किए हुए देखा जाता है. उनकी आराधना रात्री काल में की जाती है और माना जाता है कि यह साधना नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करती है. यह पूजा आत्मबल और मानसिक शांति दोनों प्रदान करती है.

मानव जीवन के लिए संदेश

वाराही देवी की कथा हमें यह सिखाती है कि शक्ति का उपयोग हमेशा सकारात्मकता, रक्षण और न्याय के लिए करना चाहिए. देवी का रूप केवल पूजा का प्रतीक नहीं, बल्कि एक मानसिक शक्ति का संकेत है जो हमें जीवन के हर कठिन मोड़ पर संभालती है. यह संदेश देती हैं कि भय या बाधा के समय, अपने भीतर की वाराही शक्तिको पहचानो और आगे बढ़ो.

 

Komal Singh
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