Hindus Donated Land To Mosque: भारत अपनी साझा संस्कृति और भाईचारे के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. इसी परंपरा को मजबूत करते हुए गुहाला गांव से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है. यहां अलग-अलग समुदायों के बीच आपसी सौहार्द और सहयोग की भावना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि देश की असली पहचान उसकी एकता में है. सोशल मीडिया पर भी इस पहल की खूब सराहना हो रही है और लोग इसे ‘असली भारत’ की तस्वीर बता रहे हैं.
ईदगाह की समस्या और समाधान
करीब 7,000 की आबादी वाले इस गांव में स्थित ईदगाह काफी पुरानी है और लंबे समय से जगह की कमी की समस्या झेल रही थी. खासकर ईद जैसे बड़े त्योहारों के दौरान आसपास के गांवों से आने वाले नमाजियों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती थी. इस स्थिति को देखते हुए गांव के पांच सैनी भाइयों—भोपाल राम सैनी, पूरणमल सैनी और उनके परिजनों—ने समाधान निकालते हुए अपनी जमीन का एक हिस्सा ईदगाह के विस्तार के लिए दान करने का फैसला किया.
बिना कीमत के जमीन दान
45 वर्षीय पूरनमल सैनी ने बताया कि मुस्लिम समुदाय की ओर से जमीन के बदले पैसे देने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. उनका कहना था कि गांव में वर्षों से आपसी प्रेम और विश्वास का रिश्ता है, जिसे पैसों में नहीं तौला जा सकता. यह फैसला केवल एक लेन-देन नहीं, बल्कि भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है.
निर्माण कार्य में भी निभाई भागीदारी
सिर्फ जमीन दान देने तक ही यह पहल सीमित नहीं रही. ईदगाह की बाउंड्री वॉल के निर्माण के दौरान सैनी भाइयों ने सक्रिय रूप से सहयोग किया. उन्होंने न केवल निर्माण कार्य की निगरानी की, बल्कि खुद श्रमदान करते हुए पत्थर लगाने तक में हाथ बंटाया. यह सहभागिता इस बात को दर्शाती है कि उनका योगदान दिल से था, न कि केवल औपचारिकता.
विरोध के बावजूद कायम रहा भाईचारा
इस फैसले के बाद कुछ रिश्तेदारों ने विरोध भी जताया और सवाल उठाया कि जमीन केवल मुस्लिम समुदाय को ही क्यों दी गई. इस पर सैनी भाइयों ने साफ कहा कि उनके लिए सभी धर्म समान हैं और जरूरत पड़ने पर वे किसी भी समुदाय के धार्मिक स्थल के लिए मदद करने को तैयार हैं. शेखावाटी क्षेत्र, खासकर सीकर जिले में, ‘छत्तीस कौम’ के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और एक-दूसरे के सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं, जो यहां की मजबूत सामाजिक एकता को दर्शाता है.