कैंसर से जंग जीतकर इस शख्स ने बदल दी धुबरी की तस्वीर, 18 साल से अकेले बना रहे हैं शहर को हरा-भरा..!

धुबरी के कालीदास साहा ने कैंसर से ठीक होने के बाद जीवन को नया अर्थ दिया. पिछले 18 सालों से वे अपने खर्च पर पेड़-पौधे लगाकर शहर को हरा-भरा बना रहे हैं.

Published by sanskritij jaipuria

असम के धुबरी शहर में रहने वाले कालीदास साहा ने अपने जीवन को एक नया अर्थ दिया. उन्होंने अपने दर्द और संघर्ष को समाज के लिए काम करने की ताकत में बदल दिया. आज उनका नाम शहर को हरा-भरा और शांत बनाने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है.

साल 2006 में कालीदास साहा को कैंसर होने की जानकारी मिली. ये खबर उनके और उनके परिवार के लिए बहुत कठिन थी. इलाज के दौरान उन्होंने मन ही मन एक संकल्प लिया कि अगर वे इस बीमारी से ठीक हो गए, तो अपना जीवन प्रकृति और समाज की सेवा में लगाएंगे. इलाज सफल रहा और एक साल के भीतर उनकी हालत में सुधार हुआ.

संकल्प से शुरू हुआ काम

स्वस्थ होने के बाद उन्होंने अपने वचन को निभाना शुरू किया. 2007 से उन्होंने धुबरी की सड़कों के किनारे पौधे और फूल लगाना शुरू किया. धीरे-धीरे उनका काम पूरे शहर में फैल गया. धुबरी के सभी 16 वार्डों में और पास के गौरिपुर इलाके में भी उनके लगाए पौधे दिखने लगे.

अपने खर्च से बनाई हरियाली

बीमा एजेंट के रूप में काम करने वाले साहा ने ये सब अपने पैसों से किया. बीते करीब 18 सालों में उन्होंने अनगिनत पेड़ और फूल लगाए. शहर की मेन सड़कों पर उन्होंने चार छोटे-छोटे बगीचे तैयार किए, जो पहले उपेक्षित जगहें थीं. इन बगीचों की देखभाल वे खुद करते हैं.

Related Post

सिर्फ अपने लगाए बगीचों तक ही नहीं, वे नगर पालिका द्वारा बनाए गए कई बगीचों की देखरेख भी करते हैं. इसके लिए उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता. ये काम वे खुशी और जिम्मेदारी के भाव से करते हैं.

जीवन से मिला सबक

61 साल कालीदास साहा कहते हैं कि कैंसर से लड़ाई ने उन्हें जीवन की असली कीमत समझाई. मौत को इतने करीब से देखने के बाद उन्हें लगा कि समाज को कुछ लौटाना जरूरी है. उनके अनुसार हरियाली मन को शांति देती है, सेहत के लिए अच्छी होती है और माहौल को बेहतर बनाती है.

उनके प्रयासों से धुबरी शहर ज्यादा सुंदर और सुकून भरा बना है. साथ ही, उनकी कहानी लोगों को ये सोचने पर मजबूर करती है कि एक व्यक्ति भी अपने छोटे कदमों से बड़ा बदलाव ला सकता है. यह कहानी आभार, मेहनत और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देती है.

sanskritij jaipuria
Published by sanskritij jaipuria

Recent Posts

क्या जो रूट तोड़ पाएंगे सचिन तेंदुलकर का महारिकॉर्ड? 35 की उम्र तक दोनों के आंकड़ों की तुलना

Joe Root: मंगलवार (30 दिसंबर) को इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट ने अपना 35वां…

January 2, 2026

Best Geyser: 6000 से भी कम में मिल रहा है शानदार गीजर, स्विच ऑन करते ही खौल जाता है पानी..!

6 Liter Water Heater: सर्दियों में गरम पानी की कमी अक्सर परेशान करती है. क्या…

January 2, 2026