कमर से नीचे सोना पहनना क्यों होता है मना? गहनों से जुड़ा यह नियम नहीं होगा पता

Gold Wearing Rules: पैरों में सोने की पायल या बिछिया नहीं पहनने की सलाह दी जाती है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है और कमर से नीचे हमेशा चांदी के गहने क्यों पहने जाते हैं. आइए, यहां जानते हैं इसका जवाब

Published by Prachi Tandon

Why not wear gold below waist: सोने या चांदी की ज्वेलरी को हमेशा लड़कियों और महिलाओं के सजने-संवरने से जोड़कर देखा गया है. भारत की महिलाएं हर तीज और त्योहार पर ज्वेलरी पहनती हैं और खूब सजती-संवरती हैं. गहने और जेवर महिलाओं की खूबसूरती में चार-चांद तो लगाते ही हैं, साथ ही अपना प्रभाव भी शरीर पर छोड़ते हैं. सोना (Gold) हो या चांदी (Silver), हर आभूषण का प्रभाव शरीर पर पड़ता है और इन्हें पहनने के नियम भी अलग होते हैं. 

ज्यादातर महिलाएं जब सजती हैं तो कमर से ऊपर सोने के गहने पहनती हैं. वहीं, कमर से नीचे यानी पैरों में पायल या बिछिया चांदी की पहनती हैं. लेकिन, ऐसा क्यों किया जाता है इसका जवाब यहां जानते हैं. 

क्यों कमर से नीचे नहीं पहना जाता है सोना?

सोना यानी गोल्ड को लेकर ऐसी मान्यता है कि यह सूरज और अग्नि का प्रतीक होता है. यह शरीर को हील करने में भी मदद करता है. इतना ही नहीं, कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि बहुत सारा सोना पहनने से वजन बढ़ सकता है. यह शरीर में एनर्जी भी बढ़ाता है.   

वहीं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोने और इसके जेवरों को माता लक्ष्मी (Goddess Laxmi) का प्रतीक माना जाता है. इसे पहनना और खरीदना सौभाग्य का प्रतीक होता है. ऐसे में अगर इसे कमर से नीचे यानी पैरों में पहना जाए तो माता लक्ष्मी के अपमान से जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि महिलाएं अपने पैरों में सोने की जगह चांदी की पायल या बिछिया पहनती हैं. 

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क्यों पैरों में पहनी जाती है चांदी?

चांदी (Silver Jewelry) को ठंडा और चांद की एनर्जी से जोड़कर देखा जाता है. एक तरफ चांदी को सेहत के लिए फायदेमंद और दूसरी तरफ मन शांत करने वाला माना जाता है. चांदी के लिए कहा जाता है कि यह महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम यानी प्रजनन तंत्र को भी हेल्दी रखने में मदद करती है.

आयुर्वेद में के अनुसार, पैर की दूसरी उंगली की नाड़ी का सीधा कनेक्शन महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम से होता है और अगर पैर की दूसरी उंगली में चांदी की बिछिया या छल्ला पहना जाए तो यह हेल्दी रहने में मदद करती है. यही वजह है कि शादीशुदा महिलाएं पैर की दूसरी उंगली में बिछिया पहनती हैं. 

चांदी को लेकर यह भी मान्यता है कि यह शरीर की एनर्जी को बचाकर रखने में मदद करती है और पैरों से बाहर जाने से रोकती है. साथ ही यह भी माना गया है कि सोने के गहने पहनने से शरीर गर्म रहता है और अगर पैरों में चांदी पहनी जाए तो दोनों तरह की एनर्जी बैलेंस हो जाती है. 

पायल में लगा घुंघरू भी है खास!

चांदी की पायल में लगा छोटा-सा घुंघरू सिर्फ आवाज नहीं करता है, इसका भी खास महत्व माना गया है. ऐसा माना जाता है कि घुंघरू की आवाज से आस-पास की नेगेटिव एनर्जी खत्म होती है. 

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