Tummy Time: क्या होता है टमी टाइम, क्यों है ये जरूरी, जानें इसके फायदे…!

Tummy Time: क्या आप जानते हैं, रोज कुछ मिनट पेट के बल लिटाने से शिशु की गर्दन, कंधे और शरीर मजबूत बनते हैं? जानिए टमी टाइम कैसे विकास और सेहत के लिए फायदेमंद है.

Published by sanskritij jaipuria

Tummy Time: टमी टाइम का मतलब है कि जब शिशु जाग रहा हो और आप उसकी देखरेख कर रहे हों, तब उसे कुछ समय के लिए पेट के बल लिटाया जाए.ये एक सिंपल लेकिन बहुत जरूरी चीज है. जन्म के बाद से ही इसे थोड़े-थोड़े समय के लिए शुरू किया जा सकता है. इससे बच्चे की गर्दन, कंधे और शरीर के बीच वाले हिस्से की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. आगे चलकर यही ताकत बच्चे को पलटने, बैठने और रेंगने में मदद करती है.

गर्दन और कंधों की ताकत

जब बच्चा पेट के बल लेटता है, तो वो अपना सिर उठाने और हाथों के सहारे ऊपर उठने की कोशिश करता है. ऐसा करने से उसकी गर्दन, पीठ और कंधों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. शुरू में बच्चा कुछ सेकंड ही सिर उठा पाता है, लेकिन धीरे-धीरे समय बढ़ने लगता है.

पेट और कूल्हों का विकास

टमी टाइम के दौरान बच्चा अपने हाथ-पैर हिलाता है और शरीर को आगे-पीछे करने की कोशिश करता है. इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कूल्हों में लचीलापन आता है. यही ताकत आगे चलकर रेंगने में काम आती है.

शरीर का सही विकास

जब बच्चा केवल पीठ के बल रहता है, तो शरीर के कुछ हिस्सों पर ही ज्यादा दबाव पड़ता है. पेट के बल रहने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों की मांसपेशियां बराबर काम करती हैं, जिससे संतुलित विकास होता है.

टमी टाइम के मेन फायदे

अगर बच्चा लंबे समय तक केवल पीठ के बल रहता है, तो सिर के पीछे का हिस्सा चपटा हो सकता है. पेट के बल समय बिताने से इस समस्या की संभावना कम हो जाती है.

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टमी टाइम से बच्चे का संतुलन और तालमेल बेहतर होता है. हाथों का सहारा लेना, खिलौनों की ओर बढ़ना और इधर-उधर देखना उसकी मोटर स्किल्स को मजबूत करता है.

पेट के बल लेटकर बच्चा दुनिया को एक अलग नजरिए से देखता है. वो आसपास की चीजों को ध्यान से देखने और उनकी ओर गर्दन घुमाने की कोशिश करता है. इससे उसकी देखने और समझने की क्षमता बढ़ती है.

गैस और पेट की परेशानी में राहत

कुछ बच्चों को गैस या कब्ज की परेशानी होती है. पेट के बल रहने से हल्का दबाव बनता है, जिससे गैस निकलने में मदद मिल सकती है.

सावधानियां और उपयोगी सुझाव

 हमेशा निगरानी रखें: टमी टाइम के दौरान बच्चे को कभी भी अकेला न छोड़ें.
 छोटे समय से शुरुआत करें: शुरुआत में दिन में 2–3 बार, 3–5 मिनट के लिए करें. जैसे-जैसे बच्चा सहज महसूस करे, समय धीरे-धीरे बढ़ाएं.
 सही समय चुनें: जब बच्चा जाग रहा हो और खुश हो, जैसे डायपर बदलने के बाद, तब ये करना अच्छा रहता है.
 सोते समय न कराएं: टमी टाइम केवल जागते समय और देखरेख में ही करें. बच्चे को सुलाने के लिए हमेशा पीठ के बल ही लिटाएं.
 आरामदायक बनाएं: अगर बच्चा रोता है, तो उसके सीने के नीचे मुलायम तौलिया रख सकते हैं या उसे अपने सीने पर लिटाकर भी टमी टाइम करवा सकते हैं.

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