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क्या आप भी हैं सिचुएशनशिप में? कपल्स थेरेपिस्ट से जान लें सबसे जरूरी बातें; मिल जाएगा दिल में उठे हर सवाल का जवाब

Valentine’s Day 2026: वैलेंटाइन डे पर किसी सिचुएशन में फंसना बिल्कुल भी अच्छा नहीं है. इस बारे में खुद एक्सपर्ट डॉ. देसाई ने बताया कि प्यार को किस तरह से बनाए रखा जाता है. ताकि आप अगली बार बेहतर को चुन सकें.

By: Preeti Rajput | Published: February 14, 2026 10:59:42 AM IST



Valentine’s Day 2026: सोशल मीडिया पर हर दूसरे दिन डेटिंग के लिए एक नया शब्द बनता है. इन दिनों “सिचुएशनशिप” और “डेलूज़नशिप” और ग्रीन-रेड फ्लैग पर हर रोज नए शब्द सुनने को मिलते हैं. आजकल के रिश्ते असली कनेक्शन के बजाए सिर्फ एक शब्द लगने लगते हैं. वायरल लेबल और छोटी-छोटी सलाह के बीच यह भूलना आसान है, लेकिन क्या आपको पता है कि लंबे समय तक चलने वाली पार्टनरशिप को क्या बनाए रखता है. लोग यह भूल चुके हैं कि असली प्यार उतना मुश्किल नहीं होता जितना इंटरनेट दिखता है.
 
HT लाइफस्टाइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कपल्स थेरेपिस्ट डॉ. देवांशी देसाई से बात की. जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से डॉक्टरेट की है. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया ट्रेंड्स की बदलती हलचल में बहने के बजाय, अच्छे विकास और इमोशनल गहराई में इन्वेस्ट करें. साइकोलॉजिस्ट इस बात पर जोर दिया कि हम अपने आस-पास जो कुछ भी पढ़ते या देखते हैं, उससे हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, लेकिन प्यार में ट्रेंडिंग बज़ वर्ड्स से कहीं ज़्यादा है. जब नया रिश्ता शुरु करने और उसे बनाए रखने की बात आती है, तो कुछ बातें पुरानी नहीं होती है.
 

क्लैरिटी सबसे जरुरी

डॉ. देसाई के मुताबिक, हम कौन हैं और हम क्या चाहते हैं. हमारी अपनी पहचान, वैल्यू और समय की उम्मीदें. क्लैरिटी सही मायने में कम्पैटिबल पार्टनर चुनने के लिए जरूरी है. वह इस बात पर जोर देती हैं, हर नए कपल को भविष्य के बारे में जरूरी सवालों पर ईमानदारी से बातचीत होनी चाहिए. तभी लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते की नींव रखी जा सके. डॉक्टर ने इन बातों पर जोर दिया कि आगे रिश्तों पर क्या-क्या चीजें असर डाल सकती हैं. एक कपल के तौर पर पैसे कैसे मैनेज करेंगे? रिश्ते में उनके लिए कौन सी बातें नॉन-नेगोशिएबल हैं? हर चीज पर दोनों को ध्यान से विचार करना होगा.

इमोशनल ईमानदारी

अनजान रिश्तों में उलझन होना तय है, भले ही Gen Z ने इसके हर शेड के लिए एक शब्द बना लिया हो. लेकिन उसके बावजूद लेबल से उलझन दूर नहीं हो सकती है. दोनों को अपने रिश्ते इमोशनल ईमानदारी, बातचीत और आपसी सम्मान के  लिए आपस में बातचीत से सामाधान निकालना बेहद जरुरी है. डॉ. देसाई के मुताबिक, मैं इस बात से हैरान हूं कि आज की पीढ़ी रिश्तों की उलझन को ‘ब्रेडक्रंबिंग’ और ‘घोस्टिंग’ जैसे शब्दों से कितनी शब्दों से कितनी सटीकता से बताती है. यह अच्छा है कि ग्रे एरिया को बताने और समझाने के लिए भाषा है और उनसे निपटने के तरीके भी हैं. इसलिए इमोशनल ईमानदारी होना जरूरी है. 

अपनी जरूरतें तय करें

आप किस तरह का कनेक्शन चाहते हैं, आप किस लेवल के किमटमेंट की उम्मीद करते हैं. आपकी इमोशनल जरूरतें और बाउंड्री किसी भी रिश्ते में जरूरी है. पार्टनर के बीच भरोसा, तालमेल और सुरक्षा की मज़बूत भावना होना बेहद जरूरी हैं. डॉ. देसाई इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अपने जीवन के लक्ष्यों – चाहे वे पर्सनल हों, प्रोफ़ेशनल हों या कुछ और – के बारे में साफ़ होना भी उतना ही ज़रूरी है और यह पक्का करना भी कि वे आपके पार्टनर के भविष्य के विज़न से मेल खाते हों. साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक, “असल में रिश्ते ज़िंदगी का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं. इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि हम रिश्ते के बाद या बिना रिश्ते के कौन हैं. मुझे यह दिलचस्प लगता है कि सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में लोग अब खुद को प्रायोरिटी देने के लिए ज़्यादा समय तक सिंगल रह रहे हैं, और कैज़ुअल डेटिंग के बजाय कमिटमेंट और मीनिंगफ़ुल रिश्ते ढूंढ रहे हैं.”
 
 

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