काम और जिंदगी का लेना हैं मजा, तो इन देशो की तरह बनाएं बैलेंस

लंबी ड्यूटी, डेडलाइन का प्रेशर और हर वक्त मोबाइल लैपटॉप से चिपके रहना इन सबने परिवार, शौक और आराम का समय छीन लिया है।

Published by Anuradha Kashyap

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में काम और पर्सनल लाइफ को बेलैंस करना किसी सपने से कम नहीं हैं। लंबी ड्यूटी, डेडलाइन का प्रेशर और हर वक्त मोबाइल लैपटॉप से चिपके रहना इन सबने परिवार, शौक और आराम का समय छीन लिया है। लेकिन दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं जिन्होंने ये साबित कर दिया है कि करियर और जिंदगी दोनों साथ साथ चल सकते हैं।

फिनलैंड : सादगी में छिपी खुशी

फिनलैंड लगातार दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में गिना जाता है। यहां लोग हफ्ते में लगभग 35-40 घंटे ही काम करते हैं। ऑफिस से निकलते ही वे काम को ऑफिस में ही छोड़ आते हैं और परिवार, दोस्तों में घुल जाते हैं। यहां के कल्चर  में सिसु शब्द खास है जिसका मतलब है हिम्मत और धैर्य। यही सोच उन्हें बैलेंस और सुकूनभरा जीवन जीने की ताकत देती है। झीलों के किनारे बैठकर या खुले आसमान के नीचे टहलकर लोग अपनी थकान उतारते हैं।

डेनमार्क और नीदरलैंड : हाइग्गे और आजादी का मजा

डेनमार्क में लोग लगभग 37 घंटे काम करते हैं और ऑफिस टाइम खत्म होते ही काम को करना पसंद नहीं करते। यहां की हाइग्गे लाइफस्टाइल आराम और छोटी छोटी खुशियों का जश्न मनाना सिखाती है।
वहीं नीदरलैंड में तो लोग पार्ट टाइम जॉब को भी बुरा नहीं मानते। यहां औसतन 30-35 घंटे काम करके भी लोग अच्छे से जीते हैं। परिवार, दोस्तों और शौक के लिए समय निकालना यहां आम बात है। साइकिल चलाना, पार्क में घूमना और वर्क ईमेल से छुट्टी लेना इनकी लाइफस्टाइल का हिस्सा है।

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नॉर्वे और स्वीडन नेचर और रिलैक्सेशन का बैलेंस

नॉर्वे की मजबूत इकॉनमी और बेहतरीन सोशल वेलफेयर सिस्टम लोगों को कम घंटे में भी प्रोडक्टिव रहने का मौका देता है। यहां लंबी छुट्टियां और आउटडोर एक्टिविटीज जैसे हाइकिंग, स्कीइंग जीवन का अहम हिस्सा हैं।
स्वीडन ने तो शॉर्ट वर्किंग डे का भी इस्तेमाल किया है। यहां की फिका कल्चर यानी कॉफी के साथ दोस्तों या क्लिग्स संग बैठकर बातें करना वहां के लोगों को काम और रिश्तों के बीच सही कोर्डिनेशन बनाता है।

जर्मनी और न्यूजीलैंड : टाइम मैनेजमेंट के मास्टर

जर्मनी के लोग वर्क लाइफ बैलेंस पर भी ध्यान देते हैं। कई कंपनियां तो कर्मचारियों को काम के बाद ईमेल करने तक को मना करती हैं। छुट्टियां में वहां लोगों को जिंदगी जीने का असली मौका देते हैं।
न्यूजीलैंड ने तो चार दिन के वर्कवीक को भी अपनाना शुरू कर दिया है। वहां का खूबसूरत नेचर समुद्र, पहाड़ और हरियाली लोगों को ऑफिस के बाद रोमांचक आउटडोर एक्टिविटीज की ओर खींच लेता है।

Anuradha Kashyap

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