Diwali 2025: कुछ ही दिनों मैं दिवाली जैसा बड़ा त्यौहार आने वाला है जिसके लिए सभी लोग बहुत एक्साइटेड हैं. लेकिन हमारे आसपास रहने वाले जानवरों के लिए यह समय अक्सर डर लेकर आता है. पटाखों की तेज़ आवाज़, धुआं उनकी आंखों और कानों पर गहरा असर डालते हैं. कई बार डर की वजह से वे इधर-उधर भाग जाते हैं और सड़कों पर हादसों का शिकार भी हो सकते हैं, ऐसे में ज़रूरी है कि हम सिर्फ अपने घर की सजावट तक सीमित न रहें, बल्कि उन मूक जानवरों के लिए भी सुरक्षित माहौल बनाएं. थोड़ी सी सावधानी और देखभाल से हम उनकी दिवाली को भी सुकूनभरी बना सकते हैं.
पटाखों से होता हैं जानवरों को खतरा
दिवाली की चमक में पटाखों का चलन आम है, लेकिन यही उनके लिए सबसे बड़ा खतरा भी बनता है, जानवर तेज़ आवाज़ों से बेहद डरते हैं. उनकी सुनने की क्षमता इंसानों से कहीं अधिक होती है, जिससे पटाखों की धमक उनके कानों को नुकसान पहुंचा सकती है. कोशिश करें कि घर या कॉलोनी के पास पटाखे न फोड़े जाएं, बच्चों को भी समझाएं कि जानवर डरने पर गुस्सा हो सकते हैं.
जानवरों के लिए बनाएं छोटा सा शेल्टर
पटाखों की आवाज़ और भीड़ से डरकर कई कुत्ते या बिल्ली सुरक्षित जगह की तलाश में भागते हैं, आप चाहें तो अपने घर या बिल्डिंग के किसी शांत कोने में उनके लिए एक छोटा-सा शेल्टर बना सकते हैं. पुराने कंबल, बॉक्स या टोकरी में सूखा कपड़ा रख दें, ताकि वे डरने पर वहां छिप सकें, अगर आसपास कोई घायल या बहुत घबराया हुआ जानवर दिखे, तो उसे खाना-पानी दें और धीरे से उसके पास जाएं.
बच्चों और पड़ोसियों को करें जागरूक
दिवाली सिर्फ सजावट और मिठाइयों का नाम नहीं, बल्कि करुणा और मिलजुल कर खुशियाँ बाँटने का भी प्रतीक है, अगर किसी जानवर को चोट लगी है या वह बहुत डरा हुआ है, तो तुरंत किसी एनिमल NGO, पशु चिकित्सक या स्थानीय हेल्पलाइन से संपर्क करें. बच्चों और पड़ोसियों को सिखाएं कि जानवरों से डरने के बजाय उनकी मदद करें, अगर हम सब मिलकर थोड़ा-थोड़ा योगदान दें, तो त्योहार का असली अर्थ जीवंत हो जाता है.

