Parenting Tips: मां-बाप की एक आदत बच्चों की सोच को कर सकती है खराब, पेरेंटिग कोच ने किया अलर्ट

Parenting Tips in Hindi: बच्चों को बचपन से शरीर की गोपनीयता और सीमाओं की समझ देना जरूरी है. उनके सामने कपड़े बदलने से बचें. सही समय पर आसान भाषा में समझाने से बच्चों की सुरक्षा और समझ दोनों मजबूत होती हैं.

Published by sanskritij jaipuria

Parenting Tips: जब बच्चा छोटा होता है, तो माता-पिता उसे चलना, बोलना और अच्छे व्यवहार सिखाते हैं. लेकिन एक बहुत जरूरी बात, शरीर की समझ और गोपनीयता, अक्सर छूट जाती है. ये सोचकर कि बच्चा अभी छोटा है, कई माता-पिता इस विषय पर बात नहीं करते.

छह साल से कम उम्र के बच्चे अभी सीख ही रहे होते हैं कि क्या सही है और क्या गलत. वे जो देखते हैं, उसी से सीखते हैं. अगर वे रोज अपने माता-पिता को उनके सामने कपड़े बदलते हुए देखते हैं, तो उन्हें ये समझ नहीं आता कि शरीर की निजी सीमा क्या होती है.

माता-पिता के सामने कपड़े बदलना क्यों ठीक नहीं

पेरेंटिंग एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चों के सामने कपड़े बदलने से बच्चे को ये लग सकता है कि शरीर की कोई प्राइवसी नहीं होती. इससे बच्चे को ये फर्क समझने में दिक्कत हो सकती है कि कौन-सी चीज पर्सनल है और कौन-सी नहीं.

जब बच्चे को सिखाया जाता है कि हर इंसान को अपनी निजी जगह का हक है, तो वो अपने शरीर का सम्मान करना सीखता है. साथ ही वो दूसरों के शरीर के बारे में भी सही सोच बनाता है.

बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी बात

बच्चों को शरीर की सीमाएं सिखाना उनकी सुरक्षा के लिए भी जरूरी है. जब बच्चा जानता है कि शरीर के कुछ हिस्से पर्सनल होते हैं, तो वो गलत छूने या गलत व्यवहार को जल्दी समझ सकता है और किसी बड़े को बता सकता है.

माता-पिता को चाहिए कि वे कपड़े बदलने और नहाने जैसी बातें बच्चों से दूर, अपनी पर्सनल जगह पर करें. इससे बच्चा खुद-ब-खुद समझने लगता है कि हर किसी की अपनी सीमा होती है.

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बच्चों से कैसे बात करें

बच्चों से इस विषय पर बात करते समय डराने या डांटने की जरूरत नहीं है. सरल शब्दों में उन्हें बताएं कि शरीर के कुछ हिस्से निजी होते हैं और बिना अनुमति किसी को छूने की इजाजत नहीं होती.

कई माता-पिता इस विषय पर बात करने में झिझकते हैं. लेकिन ये कोई गलत या शर्म की बात नहीं है. ये बच्चों को सेफ और समझदार बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम है.

बचपन की सीख

जो बातें बच्चे बचपन में सीखते हैं, वही आगे चलकर उनकी आदत बनती हैं. अगर उन्हें सही समय पर गोपनीयता और सीमाओं की समझ दी जाए, तो वे बड़े होकर ज्यादा सतर्क और अच्छे इंसान बनते हैं.

 

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