Brain Detox: त्योहारों के बाद सिर्फ शरीर नहीं; दिमाग को भी चाहिए ‘फेस्टिव क्लींजिंग’, जानिए क्यों जरूरी है ब्रेन डिटॉक्स?

Post Festive Brain Detox: त्योहारों की थकान सिर्फ शरीर को नहीं, दिमाग को भी प्रभावित करती है. जानिए एक्सपर्ट्स से कि क्यों जरूरी है दिमाग का 'फेस्टिव डिटॉक्स' और इसे सही तरीके से कैसे करें.

Published by Shraddha Pandey

Brain Relaxation: त्योहारों के दिन किसी जादू से कम नहीं होते. दोस्तों और परिवार से मुलाकातें, ठहाकों से भरी शामें, स्वादिष्ट व्यंजनों से सजी थालियां और रातभर चलने वाली गपशप. इन पलों की चमक ही तो है जो सालभर हमें खींचे रखती है. लेकिन, जैसे ही रोशनी मद्धम होती है, संगीत थमता है और मेहमान रवाना होते हैं, असलियत सामने आ जाती है. शरीर थक जाता है, नींद का रुटीन बिगड़ जाता है और मन सिर्फ एक लंबी झपकी चाहता है जो दोपहर तक चल जाए.

हम शरीर को डिटॉक्स देने की बात तो अक्सर करते हैं, लेकिन शायद ही कभी सोचते हैं कि हमारा दिमाग़ भी आराम चाहता है. लगातार मिलना-जुलना, बातें करना, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना और हर वक्त खुश रहने की कोशिश. ये सब हमारे दिमाग को भी थका देते हैं.

‘दिमाग को बिना रुके लगातार काम में लगाए रखना असंभव’

अहमदाबाद के मनोचिकित्सक डॉ. सार्थक दवे बताते हैं, “दिमाग को बिना रुके लगातार काम में लगाए रखना असंभव है. हर इंसान को कुछ समय बाद मानसिक ब्रेक की जरूरत होती है, वरना थकान और बर्नआउट होना तय है.”

डॉक्टर्स कहते हैं, “त्योहारों के दौरान दिमाग में डोपामिन नामक ‘हैप्पी हार्मोन’ की मात्रा बढ़ जाती है. स्वादिष्ट खाना, जश्न, सोशल मीडिया, और लोगों से मेलजोल. ये सब मिलकर हमें हाइपरस्टिमुलेट कर देते हैं. लेकिन जैसे ही त्योहार खत्म होते हैं, ये डोपामिन स्तर गिरता है, जिससे मूड डाउन होना, थकान या खालीपन महसूस होना आम बात है.”

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दिमाग को भी होती है एक फेस्टिव क्लींजिग की जरूरत

ऐसे में दिमाग को भी एक फेस्टिव क्लींजिग की जरूरत होती है, ताकि वह खुद को रीसेट कर सके और सामान्य रफ्तार में लौट आए. यह मानसिक डिटॉक्स भावनाओं को संतुलित करता है, स्पष्टता लाता है, तनाव घटाता है और कार्यक्षमता बढ़ाता है.

डॉक्टरों का ये भी कहना है कि दिमाग का सबसे प्राकृतिक डिटॉक्स नींद है. नींद के दौरान “ग्लिम्फैटिक सिस्टम” सक्रिय होता है, जो दिमाग में जमा विषैले तत्वों और बेकार प्रोटीन को बाहर निकालता है. यही वजह है कि अच्छी, नियमित नींद लेना ब्रेन रीसेट के लिए सबसे आसान और असरदार तरीका है.

इसके साथ ही ध्यान, हल्का व्यायाम, डिजिटल डिटॉक्स, शांत संगीत और परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताना भी दिमाग़ को संतुलन में लाने में मदद करता है, तो इस बार त्योहारों के बाद सिर्फ शरीर ही नहीं, अपने दिमाग़ को भी आराम का तोहफ़ा दें — ताकि वह फिर से साफ़, शांत और ऊर्जा से भरा महसूस करे.

Shraddha Pandey
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