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अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध से कौन सा देश हो रहा अमीर, जानें क्या है इसकी वजह?

जैसा की सभी को पता है कि इन दिनों अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच वॉर चल रहा है. ऐसे में क्या आपको पता है कि उनके वॉर से किसको ज्यादा फायदा हो रहा है. अगर नहीं तो आइए जानते हैं-

Published by sanskritij jaipuria

US Israel Iran War: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है. इस जंग में सीधे शामिल देश भारी सैन्य खर्च कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ अन्य देशों को अप्रत्याशित आर्थिक लाभ भी मिल रहा है. बढ़ती तेल की कीमतें, हथियारों की मांग में उछाल और ऊर्जा आपूर्ति के नए रास्तों ने कुछ देशों के लिए नए आर्थिक अवसर खोल दिए हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस इस संकट से सबसे ज्यादा लाभ उठा रहा है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100-115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. रूस दुनिया के बड़े ऊर्जा निर्यातकों में से एक है और इस बढ़ी कीमत से उसके राजस्व में भारी इजाफा हुआ है. इसके अलावा, भारत और चीन जैसे बड़े तेल खरीदारों ने मध्य पूर्व से सप्लाई रुकने के कारण रूस से ज्यादा तेल खरीदा. इसका फायदा मॉस्को को ऊर्जा के साथ-साथ वैश्विक ध्यान भटकाने में भी मिला, क्योंकि दुनिया का ध्यान अब रूस-यूक्रेन युद्ध से हटकर मध्य पूर्व पर केंद्रित हो गया है.

अमेरिका की डिफेंस कंपनियों को लाभ

हालांकि अमेरिका इजराइल को सैन्य समर्थन देने में अरबों डॉलर खर्च कर रहा है, लेकिन उसके कुछ सेक्टर, खासकर डिफेंस कंपनियां, इससे आर्थिक फायदा उठा रही हैं. हथियारों और सैन्य उपकरणों की बढ़ती मांग ने उनके शेयर बढ़ा दिए हैं.

साथ ही, अमेरिका की ऊर्जा कंपनियों को भी फायदा हो रहा है. यूरोप अब रूसी गैस पर निर्भर नहीं रहना चाहता, जिससे अमेरिकी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की मांग बढ़ गई है और इससे कंपनियों का राजस्व बढ़ा है.

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अन्य ऊर्जा निर्यातक देशों को भी लाभ

जो देश युद्ध के मेन क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट से दूर हैं, उन्हें भी इस स्थिति से लाभ मिल रहा है. सुरक्षित ऊर्जा सप्लायर की तलाश में यूरोप और अन्य देश नॉर्वे और कनाडा से गैस और तेल खरीद रहे हैं. नॉर्वे ने यूरोप को गैस आपूर्ति बढ़ाई और उच्च कीमत पर बेच रहा है. इसी तरह, कनाडा के तेल और गैस निर्यात की मांग बढ़ी है.

इन देशों को फायदा कई कारणों से हो रहा है. सबसे मेन कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं, जो तेल उत्पादक देशों की आय को बढ़ा देती हैं. दूसरा बड़ा कारण हथियारों और सैन्य उपकरणों की मांग में वृद्धि है, जिससे डिफेंस कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं. इस तरह, युद्ध के बीच कुछ देशों की अर्थव्यवस्था को अप्रत्याशित बढ़ावा मिला है.

 

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