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Shankaracharya Rules: भारत में क्या है शंकराचार्य का नियम, आखिर क्या है अविमुक्तेश्वरानंद का ताजा विवाद?

Shankaracharya rules: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन में विवाद, पालकी स्नान रोके जाने पर धरना. जानें पूरा मामला-

Published by sanskritij jaipuria

Rules of Shankaracharya: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर होने वाले पारंपरिक स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद सामने आया. मेला प्रशासन ने स्वामी को पालकी में सवार होकर स्नान करने से रोका, जिसके बाद उनके समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई. इसके विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना शुरू कर दिया, जो अभी भी जारी है.

स्वामी का कहना है कि प्रशासन की माफी के बिना वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे. इस बीच, मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे में ये साबित करने को कहा है कि वे शंकराचार्य हैं. इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले का भी जिक्र है.

माघ मेला प्रशासन ने स्वामी से क्या पूछा

मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा है कि उन्होंने अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ का क्यों जोड़ा. नोटिस में ये भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एक मामला अभी तक समाप्त नहीं हुआ है. ऐसे में किसी भी धर्माचार्य को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य मान्यता प्राप्त नहीं है. बावजूद इसके, स्वामी ने मेला क्षेत्र में बोर्डों पर अपने नाम के आगे ये शीर्षक लिखवा दिया.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कब बने शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद शंकराचार्य बनाया गया. स्वामी स्वरूपानंद का 11 सितंबर 2022 को 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. उन्होंने अपने निजी सचिव और शिष्य सुबोद्धानंद महाराज के माध्यम से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ का उत्तराधिकारी घोषित किया था.

हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद जारी रहा. संन्यासी अखाड़ों ने इसे मान्यता नहीं दी. निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने इसे नियमों के खिलाफ बताया.

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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

16 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पट्टाभिषेक समारोह पर रोक लगा दी थी. अदालत में सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने नई नियुक्ति का सपोर्ट नहीं किया. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई जारी रखी.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन के नोटिस का जवाब सोशल मीडिया पर देते हुए कहा कि उनका पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को वसीयत के अनुसार हो चुका है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू नहीं होता.

कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था. उनका बचपन का नाम उमाशंकर उपाध्याय था. उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और साल 2000 में स्वामी स्वरूपानंद से दीक्षा लेकर उनका नाम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रखा गया.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चित हैं. उन्होंने 2019 और 2024 में वाराणसी से लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उम्मीदवार भी खड़ा किया था. इसके अलावा, वे गौरक्षा और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं.

 

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