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West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में हुमायूं ने कराई ‘बाबर’ की एंट्री, जानिये क्या है पूरा मामला?

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा ने देशभर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.

Published by JP Yadav

Ayodhya Ram Temple Babri Masjid Dispute: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Elections 2026) में अभी एक साल से अधिक का समय बाकी है, लेकिन राजनीति अभी से तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले से 800 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद-राम मंदिर का विवाद राजनीतिक भूकंप में तब्दील हो चुका है. तृणमूल कांग्रेस के MLA हुमायूं कबीर 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की नींव रखने की योजना बना रहे हैं. वहीं, हिंदुत्व एक्टिविस्ट दो पैरेलल राम मंदिर प्रोजेक्ट्स का प्लान कर रहे हैं. इस पर अब देशभर में बवाल मच गया है. तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक दूसरे पर हमलावर हैं, जबकि कांग्रेस ने अब ममता बनर्जी को इस मुद्दे पर घेरा है.  

पश्चिम बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’

जानकारों की मानें तो पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2025 अभी दूर है, लेकिन BJP-TMC ने अभी से कई राजनीतिक मुद्दे गढ़ लिए हैं. ताजा मामला अयोध्या से 800 km दूर बाबरी मस्जिद-राम मंदिर से जुड़ गया है. तृणमूल कांग्रेस के MLA हुमायूं कबीर 6 दिसंबर, 2025 को बाबरी मस्जिद की नींव रखने का प्लान बना रहे हैं. इस तरह पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुगल शासक बादशाह की एंट्री हो गई है. इस प्रस्तावित ढांचे ने राज्य में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल में विवाद खड़ा कर दिया है. 

BJP ने भी कर दिया चैलेंज

हुमायूं कबीर के एलान के बाद चैलेंज देते हुए BJP के मुर्शिदाबाद के पूर्व प्रेसिडेंट सखारब सरकार ने दावा किया है कि वह पश्चिम बंगाल में राम मंदिर बनाएंगे. यह अलग बात है कि सखारब सरकार ने यह तय नहीं किया है कि यह राम मंदिर कहां बनेगा? BJP नेता सखारब सरकार ने कहा कि वह राम मंदिर बनाएंगे. बाबर और राम की एंट्री होने के बाद पश्चिम बंगाल में माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें मुर्शिदाबाद ज़िले के ग्रामीण इलाकों में भी समर्थक होर्डिंग्स, पोस्टर और पर्चे लेकर घूम रहे हैं.  पर्चों में लिखा गया है कि 6 दिसंबर, 2025 को राम मंदिर की नींव रखी जाएगी. ताज्जुब है कि यह अयोध्या से 856 km दूर है. इसे गिराए जाने के 3 दशक बाद यह विवाद हो रहा है. 

अचानक चर्चा में आए हुमायूं कबीर

एक सप्ताह पहले तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भरतपुर MLA हुमायूं कबीर को कोई जानता तक नहीं था, लेकिन अब वह देश-दुनिया में चर्चा में आ गए हैं. MLA हुमायूं कबीर ने यह कहकर राजनीति में तहलका मचा दिया कि 6 दिसंबर, 2025 को वह जिले के बेलडांगा ब्लॉक में बाबरी मस्जिद के एक छोटे वर्जन का ‘नींव का पत्थर’ रखने की योजना बना रहे हैं. यहां पर बता दें कि 3 दशक पहले जब वर्ष 1992 में हिंदू कारसेवकों ने अयोध्या में मस्जिद गिरा दी थी. उधर, हुमायूं कबीर की बातों के जवाब में 2 हिंदू ग्रुप्स ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में अयोध्या राम मंदिर की नकल बनाने के लिए ट्रस्ट बनाए हैं. यहां पर बता दें कि हुमांयू वेस्ट बंगाल इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी भी हैं. 

SIR मुद्दे के बीच गरमाया मंदिर-मस्जिद मुद्दा

यहां पर बता दें कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर पश्चिम बंगाल राज्य में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चल रहा है. ममता बनर्जी लगातार SIR का विरोध कर रही हैं. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) के बीच एक बड़ा मुद्दा है. जानकारों का कहना है कि एक साल से कुछ अधिक समय बाद विधानसभा चुनाव आने वाले हैं. ऐसे में बांग्लादेश से सटा मुर्शिदाबाद अचानक चर्चा में आ गया है. ममता बनर्जी अब खुद 4 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जाने वाली हैं. ऐसे में यह मामला बहुत ज्यादा गरमाया हुआ है.

वोटरों की बढ़ी संख्या ने चौंकाया

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला अचानक ही चर्चा में आ गया है. इसकी एक और वजह है, क्योंकि वर्ष 2002 के SIR के बाद से मुर्शिदाबाद में मतदाताओं की संख्या में 87.65% का इजाफा हुआ है. इसी तरह पश्चिम बंगाल के दूसरे बॉर्डर ज़िलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है. कहा जा रहा है कि उत्तर दिनाजपुर  में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या में 105.49% की बढ़ोतरी हुई है. मालदा जिले की बात करें तो यहां 94.58% मतदाता बढ़े है. साउथ-24 परगना  में 83.30% वोटर्स बढ़े हैं. पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में मतदाताओं की संख्या में 82.3% का इजाफा हुआ है. कूच बिहार  की बात करें तो 76.52% वोटर्स बढ़े हैं. नॉर्थ-24 परगना  में 72.18% मतदाता बढ़े हैं. नादिया  जिले में 71.46% जबकि दक्षिण दिनाजपुर में 70.94% वोटर्स बढ़े हैं. 

बाबरी मस्जिद जैसी ही होगी

उधर, हुमायूं कबीर का कहना है कि वह इरादे के पक्के हैं और वह 6 दिसंबर, 2025 को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे. उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि मस्जिद निर्माण की कड़ी में एक ट्रस्ट करीब-करीब बन चुका है. उन्होंने कहा कि हम बाबरी मस्जिद बनाने का प्लान बना रहे हैं. हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि यह बाबरी मस्जिद जैसी ही होगी. उन्होंने यह भी माना कि यह अयोध्या में बनी मस्जिद से छोटी होगी. हम ज़मीन लेने की कोशिश कर रहे हैं. इसके साथ उन्होंने कहा कि जो लोग राज़ी हुए थे. वे पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन के दबाव की वजह से पीछे हट रहे हैं. बावजूद इसके हुमायूं कबीर का कहना है कि हम नींव रखेंगे तो हम 6 दिसंबर को करेंगे. हुमायूं कबीर ने चुनौती देने वाले लहजे में कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं यहीं बाबरी मस्जिद बनाऊंगा. 

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3 साल में तैयार होगी मस्जिद

TMC विधायक हुमायूं का कहना है कि बाबरी मस्जिद बनाने के एलान के बाद पूरे पश्चिम बंगाल से समर्थन मिल रहा है. कबीर ने कहा कि ट्रस्ट मस्जिद की जगह पर 200 बेड का हॉस्पिटल और पांच मंज़िला गेस्ट हाउस बनाने का भी प्लान बना रहा है. उन्होंने कहा कि इसे पूरा होने में करीब तीन साल लगेंगे. उन्होंने एक बार फिर दावा किया है कि बाबरी मस्जिद बनाने के इरादे से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है. TMC विधायक हुमायूं का कहना है कि पूजा की जगह बनाना मेरा कॉन्स्टिट्यूशनल हक है.

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कांग्रेस ने उठाए ममता सरकार पर सवाल?

मुर्शिदाबाद में मंदिर-मस्जिद निर्माण विवाद में कांग्रेस की भी एंट्री हो गई है. कांग्रेस के पूर्व MP अधीर रंजन चौधरी ने TMC पर उसकी “चुप्पी” के लिए निशाना साधा है. पूर्व सांसद ने कहा है कि TMC कबीर के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कह रही है और कोई एक्शन नहीं लिया गया है. CM की चुप्पी से पता चलता है कि उन्हें उनका मौन सपोर्ट है. एक तरफ ममता बनर्जी ने जगन्नाथ मंदिर बनवाया है और अब वह कम्युनल पोलराइजेशन चाहती हैं. 

क्या कहते हैं BJP नेता

BJP के मुर्शिदाबाद के पूर्व प्रेसिडेंट सखारब सरकार भी दावा कर रहे हैं कि वह राम मंदिर बनवाएंगे. उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह 6 दिसंबर, 2025 को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करेंगे. उन्होंने कहा कि वह जमीन की डिटेल्स नहीं दे रहा हैं, क्योंकि TMC तुरंत प्रोजेक्ट के लिए रुकावटें खड़ी कर देगी. हालांकि, सखारब सरकार ने यह जरूर कहा है कि राम मंदिर बहरामपुर शहर में बनेगा. इसके साथ ही यह अयोध्या राम मंदिर का एक छोटा वर्जन होगा. बोंगियो राम सेवक परिषद चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रेसिडेंट अंबिकानंद महाराज ने कहा कि हम जल्द ही कंस्ट्रक्शन शुरू करेंगे. यह एक रेप्लिका होगी. हमें पूरे राज्य के लोगों से अच्छा फंड मिल रहा है. उन्होंने बताया कि एक राम मंदिर होगा, और उसके बगल में दो और मंदिर होंगे — एक भगवान शिव का और दूसरा हनुमानजी का होगा. 

कौन था बाबर

यहां पर बता दें कि जिस बाबर को लेकर हंगामा मचा है. आखिर वह कौन था? बाबर (1526-30) और उत्तर भारत के मुगल वंश का संस्थापक था. बाबर दरअसल, मंगोल विजेता चंगेज खान और तुर्क विजेता तैमूर (तैमूर लंग) का वंशज था. बाबर के बारे में कहा जाता है कि वह एक आक्रमणकारी था. इतिहासकारों के मुताबिक,  बाबर को आलम खान और दौलत खान ने पानीपत की लड़ाई के लिए बुलाया था. यह भी कहा जाता है कि बाबर आसानी से भारत नहीं आया बल्कि यहां आने और लड़ाई में जाने से पहले 4 बार जायजा लिया और पूरी पड़ताल की. इस दौरान गुस्साए अफगानी लोगों ने बाबर को अफगान में आक्रमण करने के लिए बुला लिया. आखिरकार अप्रैल, 1526 में बाबर पानीपत की लड़ाई जीत गया. इस जीत के बाद लोगों का लगा कि बाबर अब भारत छोड़ देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बाबर ने भारत में ही रहने का मन बना लिया. इसके बाद अपना साम्राज्य फ़ैलाना शुरू कर दिया. कहा जाता है कि पानीपत की जीत ने बाबर को हौसला दिया. इस जीत ने भारतीय राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया. बाबर के स्थापित होने के साथ ही भारत में मुगलों का शासन शुरू हो गया. 

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इतिहासकारों के मुताबिक, वर्ष 1526 में बाबर भारत आया. उसे इब्राहिम लोधी के खिलाफ युद्ध लड़ना पड़ा. पानीपत का युद्ध जीतने के बाद उसने कृतज्ञता स्वरूप पानीपत की जगह पर एक मस्जिद बनवाई थी. कहा जाता है कि यह मस्जिद मूल बाबरी मस्जिद है. यह मस्जिद काबुली बाग नामक एक छोटे से बगीचे के बीच में स्थित है और भारतीय पुरातत्व सोसायटी के संरक्षण में है. 
कुछ इतिहासकारों का कहना है कि 16वीं शताब्दी में बाबरी मस्जिद का इतिहास शुरू होता है. अयोध्या में राम जन्मभूमि माने जाने वाले स्थान पर मुगल कमांडर मीर बाकी ने मस्जिद का निर्माण करवाया था. इसके बाद यह मस्जिद 6 दिसंबर 1992 को भीड़ ने गिरा दी थी. इसके बाद अयोध्या विवाद पर एक लंबी कानूनी प्रक्रिया चली. वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का फैसला सुनाया. इसके बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया गया. 

JP Yadav

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