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Union Budget: बजट से जुड़ी 10 मजेदार बातें, जानिए दिलचस्प इतिहास और परंपराएं

Indian Budget history: केंद्रीय बजट 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी.आइए जानते हैं बजट से जुड़ी 10 मजेदार और दिलचस्प बातें.

By: Shubahm Srivastava | Last Updated: January 26, 2026 9:22:52 PM IST



Indian Budget History Facts: केंद्रीय बजट सिर्फ आंकड़ों और नीतियों का दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई दिलचस्प परंपराएं, ऐतिहासिक किस्से और अनोखे तथ्य भी जुड़े हुए हैं. 1 फरवरी को पेश होने वाला Union Budget हर साल देश की आर्थिक दिशा तय करता है, लेकिन इसके पीछे की कहानियां इसे और भी रोचक बना देती हैं. इस बार भी केंद्रीय बजट 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी.आइए जानते हैं बजट से जुड़ी 10 मजेदार और दिलचस्प बातें.

जब शाम 5 बजे पेश किया गया था बजट

ब्रिटिश शासन के दौरान बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था, क्योंकि उस समय लंदन में सुबह 11:30 बजे होते थे.यह परंपरा आज़ादी के बाद भी लंबे समय तक चली और 1999 तक बजट इसी समय पेश होता रहा.साल 2001 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे सुबह 11 बजे पेश करने की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है.

राष्ट्रपति भवन में छापा जाता था बजट

बजट छपाई से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी कम दिलचस्प नहीं है.1950 से पहले बजट राष्ट्रपति भवन में छापा जाता था, लेकिन उसी साल बजट लीक हो गया.इसके बाद से बजट नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में एक सीक्रेट बंकर में छापा जाने लगा.इस प्रक्रिया में शामिल करीब 100 अधिकारी और कर्मचारी करीब 10 दिन तक पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं.

बजट से पहले ‘हलवा सेरेमनी’ की परंपरा क्यों?

बजट से पहले होने वाली ‘हलवा सेरेमनी’ भारतीय परंपरा का हिस्सा है. शुभ कार्य की शुरुआत मीठे से करने की मान्यता के चलते बजट छपाई से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बनाया जाता है, जिसे वित्त मंत्री खुद अधिकारियों और कर्मचारियों को परोसते हैं.

सबसे छोटा बजट भाषण 

बजट भाषण की लंबाई भी इतिहास में चर्चा का विषय रही है. 1977 में वित्त मंत्री हीरूभाई पटेल ने महज 800 शब्दों में देश का सबसे छोटा बजट भाषण दिया था. इसके विपरीत, 2020 में निर्मला सीतारमण ने 2 घंटे 42 मिनट लंबा भाषण देकर रिकॉर्ड बनाया.

जब पहेली जीतने पर टैक्स लगाया टैक्स

आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में भारत में कई अजीब टैक्स लगाए गए थे. क्रॉसवर्ड या पहेली जीतने पर टैक्स, गिफ्ट टैक्स और खर्च पर टैक्स जैसे नियम उस दौर की पहचान थे, जिनमें से कुछ आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं.

ब्रीफकेस से लेकर ‘बही-खाते’ के साथ बजट पेश

तकनीक के साथ बजट की परंपरा भी बदली है. 2018 तक बजट दस्तावेज़ ब्रिटिश परंपरा के तहत ब्रीफकेस में लाए जाते थे. 2019 में निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को खत्म कर पारंपरिक ‘बही-खाते’ के साथ बजट पेश किया.

भारत का पहला बजट

भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ईस्ट इंडिया कंपनी के जेम्स विल्सन ने पेश किया था.इसका उद्देश्य 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश खजाने को मजबूत करना था.

सिर्फ अमीरों पर लगाया गया टैक्स

इतिहास में ‘गरीब आदमी का बजट’ भी पेश किया गया. आजादी से पहले लियाकत अली खान ने ऐसा बजट पेश किया, जिसमें अमीरों पर टैक्स लगाया गया था.

तीन पीएम पेश कर चुके हैं बजट 

दिलचस्प बात यह भी है कि भारत में तीन प्रधानमंत्री—जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी—प्रधानमंत्री रहते हुए बजट पेश कर चुके हैं.

रेल बजट को मिलाया गया आम बजट में 

2017 में 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हुई, जब रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया. इससे पहले 1924 से रेल बजट अलग पेश किया जाता था.

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