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Bihar Chunav: तेजस्वी ‘अर्जुन’ बने रहेंगे…मामा साधु-सुभाष की तरह बगावत लेकिन परिवार के प्रति रुख नरम, आखिर ‘लालू के लाल’ के दिमाग में क्या चल रहा है?

उस दौरान भी तेज प्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी यादव के साथ मजबूती से खड़े रहे। तब उन्होंने साधु यादव को "कंस मामा" कहकर जवाब दिया था और उन्होंने साधु यादव के आपराधिक इतिहास का भी ज़िक्र किया था। साधु यादव की तरह सुभाष यादव भी लालू यादव के साले हैं। एक समय उन्होंने भी परिवार से बगावत कर दी थी।

Published by Ashish Rai

Bihar Chunav 2025: राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का ताज़ा बयान बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ लाता दिख रहा है। यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि हाल के दिनों में तेज प्रताप यादव के ‘बगावती तेवर’ देखने को मिले थे। लेकिन, मुजफ्फरपुर के मझौलिया में एक निजी कार्यक्रम के दौरान तेज प्रताप यादव ने कहा, “मैं महुआ से चुनाव लड़ रहा हूँ, यह तय है। तेजस्वी अब भी मेरे अर्जुन हैं।” तेज प्रताप का यह बयान एक ओर न सिर्फ़ उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शा रहा है, बल्कि दूसरी ओर लालू परिवार के अंदरूनी और गहरे रिश्तों को भी बयां कर रहा है। पार्टी (राजद) और परिवार से निकाले जाने के बावजूद तेज प्रताप यादव का तेजस्वी यादव के प्रति सकारात्मक रुख़ दर्शाता है कि भले ही उन्होंने अपना नया संगठन ‘टीम तेज प्रताप यादव’ बना लिया हो, लेकिन वे परिवार से अलग नहीं होना चाहते।

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हालांकि, इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या तेज प्रताप यादव भी अपने मामा साधु यादव और सुभाष यादव की राह पर चल सकते हैं। दरअसल, तेज प्रताप का यह बयान उनके मामा साधु यादव और सुभाष यादव के लालू परिवार के साथ तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आपको बता दें कि लालू यादव के साले साधु यादव कभी राजद सुप्रीमो (लालू प्रसाद यादव) के करीबी थे, लेकिन 2004 में लालू से मतभेद के बाद उन्होंने अलग राह पकड़ ली। साधु यादव ने 2010 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और लालू परिवार की आलोचना की। 2021 में साधु यादव ने तेजस्वी यादव की शादी पर एक विवादित टिप्पणी की जिसने खूब सुर्खियाँ बटोरीं। साधु यादव ने तेजस्वी यादव की एक ईसाई लड़की से शादी को “परिवार की छवि खराब करने वाला” बताया था और राजद से बगावत कर दी थी।

जब तेजस्वी के पक्ष में खुलकर सामने आए तेज प्रताप

उस दौरान भी तेज प्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी यादव के साथ मजबूती से खड़े रहे। तब उन्होंने साधु यादव को “कंस मामा” कहकर जवाब दिया था और उन्होंने साधु यादव के आपराधिक इतिहास का भी ज़िक्र किया था। साधु यादव की तरह सुभाष यादव भी लालू यादव के साले हैं। एक समय उन्होंने भी परिवार से बगावत कर दी थी। सुभाष यादव ने 2009 में राजद छोड़कर अलग संगठन बनाया था और लालू के खिलाफ तीखी बयानबाजी की थी। दोनों ने लालू परिवार के खिलाफ बाहरी दलों के साथ गठबंधन किया था, जिससे राजद को नुकसान भी हुआ था। खास बात यह थी कि महत्वाकांक्षा की इस खींचतान में लालू यादव के दोनों साले (साधु यादव और सुभाष यादव) हमेशा से लालू परिवार के फिर से करीबी बनना चाहते थे। वहीं, तेज प्रताप यादव से जुड़े विवाद के बीच भी तेज प्रताप यादव का रुख अपने मामा साधु यादव और सुभाष यादव से अलग है। साधु और सुभाष ने जहां अपने साले लालू यादव और तेजस्वी यादव की खुलकर आलोचना की, वहीं तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी यादव को “अर्जुन” कहकर एक तरह से उनके नेतृत्व को स्वीकार कर लिया है।

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तेज प्रताप लालू परिवार से अलग-थलग पड़ गए लेकिन…

दरअसल, तेज प्रताप यादव का ताजा बयान उनके पुराने बयानों से मेल खाता है, जब वह खुद को “कृष्ण” और तेजस्वी को “अर्जुन” कहते रहे हैं। अब जब अपनी कथित प्रेमिका अनुष्का यादव के साथ संबंधों को लेकर लालू परिवार से अलग-थलग पड़े तेज प्रताप को राजद और परिवार दोनों से निष्कासित कर दिया गया, तो कई तरह की अटकलों, संभावनाओं और आशंकाओं ने भी जन्म लिया। इस बीच, राजद से निष्कासित होने के बाद तेज प्रताप ने एक नया संगठन टीम तेज प्रताप बनाने का ऐलान किया और वैशाली के महुआ से निर्दलीय चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया। लेकिन, इसके बाद भी वे हमेशा छोटे भाई तेजस्वी यादव या पिता लालू यादव के खिलाफ तीखी टिप्पणी करने से बचते रहे। ज़ाहिर है, तेज प्रताप यादव की यह रणनीति दर्शाती है कि वे अपने परिवार से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ना चाहते। एक ओर, साधु और सुभाष की बगावत ने राजद को कमज़ोर किया, लेकिन तेज प्रताप का मामला अलग है क्योंकि अलग रहते हुए भी वे परिवार को राजनीति से ऊपर रखते हैं।

तेज प्रताप की इस रणनीति से राजद खतरे में है!

हालांकि, हकीकत यह भी है कि तेज प्रताप यादव अपने समर्थकों के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी हैं। लेकिन, वे हमेशा परिवार को प्राथमिकता देते हैं। हाल ही में एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि परिवार और राजनीति बिल्कुल अलग-अलग चीज़ें हैं। अब जबकि उन्होंने महुआ सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, तो उनके मामा साधु यादव और सुभाष यादव की तरह उनका यह फैसला भी राजद के लिए चुनौती बन सकता है। बिहार विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप की यह रणनीति राजद के वोट बैंक, खासकर यादव और मुस्लिम मतदाताओं पर असर डाल सकती है।

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Ashish Rai

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