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क्या आपके बच्चे भी पीते हैं Tang Or Rasna, तो अभी कर दे बंद, किसी जहर से कम नहीं है ये ड्रिंक्स

Tang Or Rasna Harmful Effects: टांग और रसना जैसे ड्रिंक्स में टाइटेनियम डाइऑक्साइड होता है, जो शरीर में जमा होकर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है. यूरोप में बैन है, पर भारत में अभी भी इसका इस्तेमाल जारी है.

Published by sanskritij jaipuria

Tang Or Rasna Harmful Drinks: आजकल गर्मी के मौसम में बच्चे प्यास बुझाने के लिए रंग-बिरंगे ड्रिंक पीना बहुत पसंद करते हैं. इन ड्रिंक्स में टांग (Taang) और रसना (Rasna) जैसे नाम सबसे ज्यादा फेमस हैं. यहां तक की बड़े लोग भी इसे गर्मी में पीना काफी पसंद करते हैं. माता-पिता को लगता है कि इनमें सिर्फ ज्यादा चीनी ही समस्या है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गंभीर है.

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि इन ड्रिंक्स का नुकसान केवल ज्यादा शक्कर की वजह से होता है. सच तो ये है कि इन ड्रिंक्स में 90 प्रतिशत से ज्यादा चीनी होती है, जो अपने आप में ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. लेकिन असली खतरा एक और तत्व से आता है जिसका नाम है टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide).

What is Titanium Dioxide: टाइटेनियम डाइऑक्साइड क्या है?

टाइटेनियम डाइऑक्साइड एक कैमिकल पदार्थ है जिसका इस्तेमाल कई खाद्य पदार्थों, मिठाइयों और ड्रिंक्स में रंग और चमक बढ़ाने के लिए किया जाता है. इससे पेय सुंदर और चमकदार दिखता है. जब टांग या रसना जैसी ड्रिंक गिलास में डाली जाती है, तो उसका चमकदार रंग इसी के कारण दिखाई देता है.

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 ये कितना हानिकारक है?

यूरोपियन यूनियन और फ्रांस जैसे देशों ने टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. शोधों में पाया गया है कि ये पदार्थ शरीर में जमा होकर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है. डीएनए को हानि होने का मतलब है कि शरीर की कोशिकाओं का सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. बच्चों का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए उन पर इसका प्रभाव और ज्यादा हानिकारक हो सकता है.

भारत में अब भी क्यों मिल रहा है ये तत्व?

भारत में ये पदार्थ अब भी कानूनी रूप से अनुमति प्राप्त है. इस कारण कई कंपनियां इसे अपने उत्पादों में मिलाती हैं ताकि उनका रंग और लुक बेहतर दिखे. कुछ स्वास्थ्य संगठनों और नागरिकों ने FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) से अनुरोध किया है कि इस पर बैन लगाया जाए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

जब तक सरकार या एफएसएसएआई इस पर कोई निर्णय नहीं लेती, तब तक हमारे पास एक ही ऑप्शन है हम खुद और कंपनियां जिम्मेदारी दिखाएं. कंपनियों को चाहिए कि वे अपने उत्पादों से टाइटेनियम डाइऑक्साइड को हटाएं और उपभोक्ताओं को भी ऐसे उत्पाद खरीदने से पहले उनके घटक (ingredients) जरूर पढ़ने चाहिए.

sanskritij jaipuria

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